बिहार-ओडिशा तक सक्रिय ‘मुंगेर गैंग’ का रांची में भंडाफोड़,12 बदमाश धराए

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मुंगेर गिरोह पिछले कई वर्षों से बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के विभिन्न रेलखंडों पर चोरी-छिनतई की घटनाओं को अंजाम देता रहा है। गिरोह का सरगना मुंगेर स्थित पड़िया का रहने वाला है……”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। ट्रेनों में चोरी-छिनतई करने वाले मुंगेर गैंग का भंडाफोड़ कर रेलवे पुलिस बल(आरपीएफ) ने बड़ी सफलता पायी है। आरपीएफ की 15 सदस्यीय टीम ने किता-रांची रेलखंड पर अंतर्राज्यीय गिरोह के 12 सदस्यों को दबोचा है। सभी सदस्य हटिया आ रही बर्द्धमान पैसेंजर में सवार थे।

पकड़े गए बदमाशों में अजय कुमार मंडल बरियारपुर मुंगेर, दीपांकर घोष महेशपुर राज पाकुड़, महेश साव बरियारपुर मुंगेर, अजय कुमार गुप्ता महेशपुर खगड़िया, संतोष साव बरारी कटिहार, ईश्वर चंद्र साह महेशपुर खगड़िया, हेमकांत महतो बरारी कटिहार, ललन कुमार यादव बरारी भागलपुर, प्रदीप मंडल बरियारपुर मुंगेर, रामजी तांती गोगरी खगड़िया, रवि सैनी कोतवाली मुंगेर, धर्मचंद्र यादव बरियारपुर मुंगेर शामिल है।

आरपीएफ ने इन बदमाशों से 56 हजार 500 रुपए नकद और करीब तीन तोला जेवर (90 हजार रुपए) बरामद किया। आरोपियों से पूछताछ करने के बाद आरपीएफ ने उन्हें रांची जीआरपी थाना को सौंप दिया।

आरपीएफ के मुताबिक हाल के दिनों में इस सरगना के रांची मंडल के अंतर्गत रेल खंडों पर सक्रिय होने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर विभिन्न ट्रेनों में आरपीएफ की टीम इस गिरोह की तलाश कर रही थी।

आरपीएफ की 15 सदस्यीय टीम तलाशी के लिए हटिया-खड़गपुर ट्रेन से मुरी की ओर गई थी, लेकिन इनका सुराग नहीं मिला। इसी दौरान बर्द्धमान-हटिया पैसेंजर के किता स्टेशन से खुलने के बाद चार संदिग्धों पर आरपीएफ की नजर पड़ी।

बेटिकट यात्रा कर रहे इन लोगों से कड़ाई से पूछताछ करने पर पता चला कि उनकी टीम के अन्य आठ सदस्य दूसरी बोगी में है।आरपीएफ ने तत्काल वहां भी धावा बोल कर सभी को पकड़ लिया। रांची लाने के बाद रात भर आरपीएफ पोस्ट में इनसे पूछताछ होती रही।

आरपीएफ के अनुसार गिरोह के सदस्यों ने बताया कि वे अक्सर पैसेंजर ट्रेनों में भीड़ होने पर चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया करते थे। गिरोह के सदस्य यात्रियों से घुल-मिल जाते थे

सफर के दौरान यात्रियों के बैग को निशाना बनाकर उससे सामान उड़ाया करते थे। गैंग के पास एक स्क्रू ड्राइवर भी मिला। जिसके सहारे ट्रौली बैग की चेन को खोल सामान निकाल लेते थे। सामान निकालने के बाद ट्रौली बैग की चेन को पुन: खींच कर लगा देते थे।

यात्रियों को घर जाकर सामान के गायब होने का पता चलता था। इस वजह से पुलिस के पास शिकायतें भी नहीं आती थीं। गैंग के सदस्य चोरी की नगद राशि को आपस में बांट लिया करते थे।

गिरोह के सदस्य गिरोह के सदस्य एक जनवरी को भागलपुर-रांची एक्सप्रेस से रांची आए थे। ये आपस में बंटकर रांची के स्टेशन रोड स्थित जनता होटल और सम्राट होटल में ठहरे थे।

इन होटलों में ठहरने के दौरान इन्होंने रांची से आवाजाही करनेवाली विभिन्न पैसेंजर ट्रेनों में घटनाओं को अंजाम दिया।

आरपीएफ को गैंग के सदस्य प्रदीप ने बताया कि रेल यात्रियों से चोरी किए गए जेवरात वह मुंगेर में खपाया करता था। मुंगेर स्थित पूरबसराय में अशोक सोनार के पास चोरी के गहने बेचा करता था। यहां पर गहने को तत्काल गला कर इन्हें पैसे का भुगतान कर दिया जाता था। हाल में ही उसने सोनार को 30 तोला गहना बेचा था।  

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