बिहार उपचुनावः सहानुभूति लहर में बेटों और पत्नी ने बचाई ‘विरासत’

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पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज ब्यूरो)। बिहार में लोकसभा के एक तथा विधानसभा के दो उपचुनाव में दोनों गठबंधन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थीं। महागठबंधन टूटने के बाद हो रहे इस उपचुनाव में सीएम नीतीश कुमार के लिए लिटमस टेस्ट माना जा रहा था।

इस चुनाव में सबसे दिलचस्प यह रहा कि जिन तीन सीटों पर चुनाव हुए,वे वहाँ के सांसद तथा विधायक के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थीं। इन सभी तीन सीटों पर दलों ने रिश्तेदारों को ही टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा। जहाँ उन्हें सहानुभूति वोट का लाभ मिला।वे सभी अपने विरासत को बचाने में कामयाब रह गए।

इस उप चुनाव में राजद ने अपनी अररिया लोकसभा और जहानाबाद विधानसभा सीट पर कब्जा बरकरार रखा तो वहीं भाजपा भभुआ विधानसभा सीट बरकरार रखने में सफल रही। वही जहानाबाद में जदयू की भद पीट गई।

बिहार के अररिया लोकसभा, जहानाबाद तथा भभुआ विधानसभा उपचुनाव की मतगणना कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह आठ बजे शुरू हुई। मतगणना के शुरुआती रूझान में कभी राजद तो कभी बीजेपी आगे चल रही थीं।

लेकिन 11 बजे के बाद तस्वीर लगभग साफ हो चुकी थीं कि चुनाव के नतीजे लगभग वहीं रहेंगे जो पहले थें। सब की निगाहें अररिया तथा जहानाबाद पर लगी हुई थीं। राजनीतिक हलके में यह एनडीए गठबंधन के लिए प्रतिष्ठा का सबब बना हुआ था।

जहानाबाद का चुनाव परिणाम काफी चौंकाने वाला रहा। जिसकी उम्मीद शायद एनडीए नहीं कर रहा था। अंतिम समय में भाजपा के मना करने पर जदयू ने जहानाबाद से अभिराम शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा लेकर उसे यहां मुँह की खानी पड़ी। राजद के कृष्ण मोहन उर्फ सुदय यादव ने लगभग 36 हजार मतों से जीत हासिल की।

अररिया लोकसभा उपचुनाव में सीमांचल के गांधी कहे जाने वाले दिवंगत मो तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थीं। राजद के सामने सबसे बड़ी चुनौती यहां एक कद्दावर नेता चुनने की थीं। लेकिन बिल्ली के भाग्य छींका टूटा। जदयू के विधायक और मो तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम जदयू छोड़ राजद में शामिल हो गए।

राजद ने बिना कोई देरी किए उन्हें अररिया से उम्मीदवार घोषित कर दिया ।जिसका परिणाम यह हुआ कि उनके परिवार का कब्जा इस सीट पर बरकरार रहा। उनके विरासत को बचाने में उनके पुत्र सफल रहें । सरफराज आलम अपने निकटतम प्रत्याशी प्रदीप कुमार से लगभग 58 हजार मतों से निर्णायक बढ़त बना रखी है। भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार अपनी हार देखते हुए मतगणना केन्द्र से निकल गए।

अररिया लोकसभा उपचुनाव के चुनाव के दो दिन पहले  बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने चुनाव रैली में यह कहकर हाय तौबा मचा दी थीं कि अगर यहां से राजद जीती तो सीमाचल आईएसएस का गढ़ बन जाएगा।

लेकिन राजद के परम्परागत मुस्लिम यादव समीकरण के आगे बीजेपी अध्यक्ष का आईएसआई का राग फेल रहा। अररिया लोकसभा से विजयी सांसद सरफराज आलम 2000 के विधानसभा चुनाव में पहली बार अररिया से राजद के टिकट पर चुने गए थें ।

भभुआ विधानसभा सीट से दिवंगत भाजपा  विधायक आनंद भूषण की पत्नी रिंकी पांडे ने जीत हासिल की ।उन्होंने कांग्रेस के शंभू पटेल को लगभग 16 हजार  मतों से हराकर अपने पति की विरासत को बचाने में सफल रही।

जहानाबाद का चुनाव परिणाम एनडीए के लिए गहरा झटका बताया जा रहा है।यहाँ से जदयू के हार के लिए गठबंधन की अंदरूनी कलह बतायी जा रही है। यहां से सांसद अरूण कुमार सिंह का साथ जदयू प्रत्याशी अभिराम शर्मा को नहीं मिला।हार की एक वजह यह भी मानी जा रही है।

इस उपचुनाव में राजद तथा बीजेपी ने अपनी प्रतिष्ठा तो बचा ली है।लेकिन अंतिम समय में जहानाबाद में अपना उम्मीदवार खड़ा करने में हाथ पीछे कर जदयू को अपना उम्मीदवार देने की बात कहीं थी। इस रणनीति में भाजपा कामयाब तो रही लेकिन उसने सीएम नीतीश कुमार की भद करवा दीं ।

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बगैर पहली बार चुनाव लड़ी राजद के पक्ष में चुनाव परिणाम रहने से गदगद प्रतिपक्ष नेता तेजस्वी यादव ने ट्विट करते हुए लिखा “आपने लालू को नहीं एक विचार को कैद किया है। यही विचारधारा आपके अहंकार को चूर चूर करेगी।

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