बड़ा भाई भरोसे भाजपा, जिला कार्यसमिति से बाहर हुए छोटे मुखिया

चुनावी समर में भाजपा बिहार में अब छोटे भाई की भूमिका में आ गयी है। इसका असर नालन्दा जिला भाजपा संगठन के विस्तार में भी साफ तौर पर दिख रहा है…..”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क।  विधानसभा चुनाव में जदयू भाजपा का गठबंधन तय है। तभी तो भाजपा नालन्दा का संगठन विस्तार भी कुछ ही विधानसभा में निपटा दिया गया है।

भाजपा नालन्दा जिलाध्यक्ष प्रो रामसागर सिंह द्वारा जिला कैबिनेट विस्तार में 18 सदस्यों में अध्यक्ष, महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री सहित कुल 4 सदस्य राजगीर विधानसभा से तो 7 सदस्य अकेले बिहारशरीफ विधानसभा से हैं। ज़ाहिर है कि कैबिनेट में भी भाजपा को राजगीर और बिहारशरीफ तक ही समेट दिया गया है।

वही 66 सदस्यीय जिला कार्यसमिति की घोषणा में आधे सदस्य एक खास जाति से है और वो भी अधिकांश राजगीर विधानसभा क्षेत्र से। भाजपा के वर्तमान और पूर्व के जिलाध्यक्ष द्वारा लगातार चौथे बार महामंत्री पद पर राजेश्वर सिंह को सुशोभित कर उसी जातिवाद को बढ़ाया गया है।

संगठन में अतिपिछड़ों और अनुसूचित, दलित जातियों का समावेश का अभाव है। जो आने वाले समय में अहितकर साबित होगी।

जिस तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने  खुलासा किया कि प्रशांत किशोर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के निर्देश पर जदयू में लाया गया। उसी तरह भाजपा जिलाध्यक्ष द्वारा जारी कार्यसमिति में भी बड़े भाई जदयू की भूमिका नज़र आ रही है।

यही वजह है कि नालन्दा से भाजपा के पूर्व प्रत्याशी कौशलेंद्र कुमार उर्फ छोटे मुखिया भी सूची में नही है। जबकि चुनाव लड़े हुए प्रत्याशी कार्यसमिति के सदस्य होते है।

बिहारशरीफ विधायक डॉ सुनिल कुमार, इस्लामपुर पूर्व विधायक राजीव रंजन, वीरेंद्र गोप तो सूची में है, लेकिन छोटे मुखिया को भाजपा संगठन से विलोपित कर दिया गया है।

ज़ाहिर है कि भाजपा जदयू गठबंधन के बाद उतपन्न परिस्थिति में भाजपा अपने पूर्व के प्रत्याशियों को बाहर का रास्ता दिखा रही है। एनडीए का सबसे सुरक्षित गढ़ नालन्दा विधानसभा क्षेत्र है, जहां मंत्री श्रवण कुमार की दावेदारी तय है।

लगे हाथ नालन्दा भाजपा जिलाध्यक्ष अपने विरोधियों को भी इसी बहाने बैरंग का रास्ता दिखा रहे। सबसे ज्यादा दिलचस्प कैबिनेट सूची में जिला उपाध्यक्ष पद पर नवाजे गए कौशल किशोर है, जो कि महामहिम हरियाणा राज्यपाल और राजगीर से पूर्व विधायक श्री सत्यदेव नारायण आर्य के पुत्र है।

इनकी राजगीर सुरक्षित क्षेत्र से दावेदारी के ख्याल से संगठन में तवज्जो दी गई है। आने वाले समय में पता चलेगा कि राजगीर की जनता परिवारवाद के साथ चलती है या कुछ नया करेगी।

भाजपा के तेजतर्रार सोशल चेहरा पूरे जिले में दौरा करने वाले डॉ आशुतोष कुमार को भी शंटिंग लाइन में डाल दिया गया है। भाजपा के पुराने चेहरे अमरकांत भारती, धीरेंद्र रंजन, सियाशरण आर्य, श्याम किशोर सिंह जैसे ज़मीनी कार्यकर्ताओं को अलग थलग करना चुनावी मौसम में पैर पर कुल्हाड़ी मारना साबित हो सकता है।

विधानसभा चुनाव के दृष्टिकोण से भाजपा अपने पार्टी के अंदर के विरोधियों और संभावित भविष्य के प्रत्याशियों को फिलहाल भाजपा संगठन से साइड किया जा रहा है। ज़ाहिर है कि भाजपा संगठन अब पूरी तरह छोटे भाई की भूमिका में आकर जदयू के निर्देशित रास्ते पर चल पड़ी है।

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