फर्जी मुकदमेबाजों का अड्डा बना राजगीर थाना, अब SDO ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए कराई यूं फर्जी FIR

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दोष मिट्टी का क्या कहें जानिब, यहां गुरबत में भी लोग मदचूर हो चले हैं। किसी शायर की यह पंक्ति राजगीर पुलिस-प्रशासन पर सटीक बैठती है…..

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज। सीएम नीतिश कुमार के कथित गृह जिले नालंदा के अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन-धर्म नगरी राजगीर में कानून का अधर्म राज चल रहा है। यहां पुलिस-प्रशासन में पदस्थ प्रायः लोग के कारनामें चौंकाने वाले रहे हैं।

पुलिस थाना तो सिर्फ फर्जी मुकदमों का अड्डा बना है। अगर जांच हो तो इस मामले में इस थाना को बिहार टॉपर का तमगा जरुर मिलेगा। जितनी गहराई, उतने अंक। यह दीगर बात है कि नीचे के अफसर से अधिक उपर वाले क्रेडिट बटोर जाएंगे।

एक ही व्यक्ति पर एक ही दिन कई मुकदमें लाद दिए जाते हैं। उसी आधार पर सीसीए की भी कार्रवाई हो जाती है। उसका कसूर सिर्फ इतना होता है कि वह एक अधार्मिक रैकेट को रोकने के लिए पटना हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर करता है और माननीय न्यायाल उसे रोकने के लिए कड़े निर्देश देती हैं।

लेकिन यहां रुकता कुछ नहीं है। और शुरु हो जाती है आवाज उठाने वाले पर ही धंधेबाजों की सांठगांठ से पुलिस-प्रशासन का ब्रजपात, जोकि वर्ष 2015 से अब तक जारी है। लेकिन शायद इस खेल के शातिर ये भूल गए हैं कि बिहार में “ब्रजेश ठाकुरों” का समय और कानून क्या हाल करती है।

मीडिया वालों को तो यहां ‘कमजोर की बीबी,सबकी भौजाई’ समझी जाती है। जब चाहो उसे मसल डालो की मानसिकता। दलाली करो,चमचई करो, आरती उतारों और चेहरा चमकाओ। अगर जन मुद्दों की बात कोई करता है तो सब बिरनी की तरह उसके पिछे…फर्जी पुलिसिया केस का डंडा हाथ में लिए..।

सर्वत्र लुच्चे लफंगों का ही बोलबाला दिखता है। आम जनता की नजरें शर्म से झुक जाती है, जब ऐसे फ्रॉड क्रिमीनल लोग कानून-व्यवस्था के रहनुमाओं के नीजी-पारिवारिक आयोजनों में अट्टहास उड़ाते दिखते हैं।

बहरहाल, पुराने की नए आए यहां के दोनों हाकिम यानि डीएसपी-एसडीओ के रीजन में कई ऐसे मामले खुलकर सामने आए हैं, जिनमें इनकी सीधी संलिप्ता सुशासन की सारी पोल जाती है। एक ऐसा ही मामला राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष उमेश भगत पर हुई फर्जी एफआईआर के रुप में सामने आई है।

उमेश भगत का साफ कहना है कि राजगीर नगर पंचायत के सफाईकर्मियों ने अपनी पीड़ा और उपेछा से अजीज आकर हड़ताल पर उतरे तो एसडीओ संजय कुमार और कार्यपालक पदाधिकारी ने उनके आलावे कई अन्य सफाईकर्मियों पर पुलिस से फर्जी केस करवा दिया।

वेशक राजगीर एसडीओ और नगर पंचायत के पदाधिकारी ने सफाईकर्मियों और उसके संघ नेता के साथ अपनी प्रशासनिक नाकामियों को छुपाने की मंशा से जिस तरह के दमनकारी प्रवृति का परिचय दिया है, वह सीएम नीतीश कुमार के सुशासन के दावों के मुंह पर फिरएक तमाचा है और पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सबाल कायम रखता है….

सुनिए वीडियो कि क्या कहते हैं उमेश भगत…….

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