पीएम की जुबान से राष्ट्रीय फलक पर छाया ओरमांझी का आरा-केरम गांव

रांची से लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित ओरमांझी के टुंडाहुली पंचायत के आराकेरम गांव हैं, जो ‘आदर्श ग्राम’ की श्रेणी में आते हैं। यह गांव श्रमदान की मिसाल पेश कर चुके हैं……..”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। आज पीएन नरेन्द्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में जल संरक्षण के लिए पूरे देश के सामने एक उदाहरण पेश करते हुए जैसे ही राँची के ओरमांझी प्रखण्ड के आराकेरम गांव का नाम लेते हुए बधाई दी, लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई।

सीएम रघुवर दास ने आराकेरम गांव वासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि झारखण्ड में जल संरक्षण एक जनांदोलन का रुप ले रहा है। राँची के आराकेरम गांव के लोगों ने पूरे देश के सामने मिसाल पेश की है।

सीएम ने जल संरक्षण के क्षेत्र में झारखण्ड के प्रयासों को राष्ट्रीय पटल पर लाने के लिए पीएम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को भी कोटि-कोटि धन्यवाद दिया है।

ज्ञात हो कि सीएम ने पिछले साल इसी गांव में नशामुक्त घोषित किये जाने पर गांव में चौपाल लगाकर उन्हें बधाई दी और उन्हें प्रेरित करते हुए एक लाख रुपए ईनाम दी थी।

बता दें कि रांची से लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित ओरमांझी के टुंडाहुली पंचायत के आराकेरम गांव हैं, जो ‘आदर्श ग्राम’ की श्रेणी में आते हैं। यह गांव श्रमदान की मिसाल पेश कर चुके हैं। 

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बसे इस गांव में 110 घरों में लगभग 550 लोग रहते हैं। श्रमदान से ग्रामीणों ने एक साल में दोनों गांवों की तसवीर बदल दी है। आदर्श गांव का तमगा पाकर यह गांव रूका नहीं और निरंतर आगे बढ़ रहा। इस गांव के लोग अब जल संचय के लिए काम करने दिशा में अनूठा कार्य कर दिखाए

श्रमदान के जरिये पूरे पहाड़ में लूज बोल्डर स्ट्रक्चर बनाया गाय, ताकि पहाड़ के पानी को रोका जा सके। जंगल का पानी जंगल में ही रोकने के लिए गांव के लोग श्रमदान किए। इनकी कोशिश थी कि वैसे झरने या जल स्रोत जिनका पानी सूख गया है,  वहां दोबारा पानी आ सके।

इस जंगल के अलावा गांव वालों ने कई योजनाओं के तहत गांव की जमीन को भी सूखामुक्त कर दिया था। इस गांव में 50 एकड़ जमीन है 20 एकड़ अपलैंड हैं। 20 करोड़ लीटर पानी यहां से जमीन में प्रवेश कर गांव को जिंदा कर दिया।

दरअसल गांव में बदलाव को लेकर लोगों की प्रतिबद्धता और एकजुटता ने सरकार और साहबों को अपने दरवाजे पर बुला लाया। राज्य के सीएम रघुवर दास कई आला अफसरों के साथ आराकेरम गांव पहुंचे थे। सीएम ने वहां चौपाल लगाई। साथ ही नशामुक्त होने के लिए इस गांव को एक लाख रुपए का इनाम भी दिया।

आराकेरम के लोगों को इसका भी गुमान है कि पहाड़, जंगल को बचाने, श्रमदान, स्वच्छता, नशाबंदी और सामूहिक फ़ैसले के असर से अब सरकार भी गांव तक पहुंची।

कई महीनों की मुहिम और मशक्कत के बाद गांव वालों ने शराब बनाना और पीना छोड़ दिया। गांव में घुसते ही आपकी नजरें लोहे की एक बोर्ड पर पड़ेगी, जिसपर लिखा गया है.. मुस्करायें कि आप नशामुक्त आराकेरम गांव में प्रवेश कर रहे हैं।

सरकार विज्ञापनों के जरिए ये बताने में जुटी गई कि आराकेरम के लोगों ने मिसाल पेश की है। उसी तर्ज पर झारखंड के एक हजार गांवों को आदर्श बनाया जाएगा।

इस गांव में हुसैन अंसारी का एकमात्र मुसलमान परिवार है। हुसैन साहब का परिवार गांव के सभी घरों के दिलों में बसता है। ग्राम प्रधान के मुताबिक़ उन लोगों ने परिवार के लिए छोटी ही सही, एक मस्जिद बनाने का फ़ैसला लिया है, ताकि हुसैन चाचा को नमाज़ पढ़ने दूसरे गांव न जाना पड़े।

हुसैन ने गांव में कच्चे-पक्के हर घरों की दीवारों पर गौर करने को कहा। ये दीवारें नीले रंग से रंगी थीं और उन पर जागरूकता के नारे लिखे गए।

ये मुकाम हासिल करने में ग्राम प्रधान के साथ महिला-पुरुष ने साझेदार की भूमिका अदा की। यहां अब झगड़े-फसाद नहीं होते। सिर्फ़ तरक्की की बात होती है। यहां हड़िया-शराब बनाने के सारे बर्तनों को घरों से इकट्ठे बाहर निकालने के साथ ठठेरे को बुलाकर उसे बेच दिया गया।

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