नालंदा JJB का कड़ा एक्शनः ‘ऐसे कर्तव्यहीन बिहार थानेदार हाजिर हों’

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नालंदा पुलिस के कतिपय थानेदार अपने कर्तव्यों के प्रति कितने लापरवाह हैं, यह नालंदा जिला किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेद्र मिश्र के इस आदेश से साफ स्पष्ट होता है.………..”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। नालंदा जिला बाल किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र ने 22 अगस्त को भादवि की धारा 147,148,149, 323,337, 338,353,307 IPC एवं 27 आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज बिहार थाना कांड संख्या-550/2019 मामले में अनुसंधानकर्ता/बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी को सदेह उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा है कि क्यों न उनके खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय एवं वरीय पुलिस अफसरों को विभागीय कार्यवाही को लिखा जाए।

बताया जाता है कि उक्त कांड में एक आरोपी किशोर को मार्ग रक्षा बल द्वारा पुलिस वर्दी में हथकड़ी लगाकर न्याय परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।

जबकि किशोर न्याय अधिनियम-2016 के नियम 8(3)(ii) के अनुसार “किशोर को कोई हथकड़ी, जंजीर या अन्यथा बेड़ी नहीं पहनाएगा तथा बालक पर किसी भी प्रकार के दबाव या बल का प्रयोग नहीं करेगा।”

विदित हो कि नालंदा जिला किशोर न्याय परिषद द्वारा समय-समय पर आयोजित त्रैमासिक कार्यशाला में उक्त नियम की जानकारी दी जाती रही है और किशोर न्याय से संबंधित सुसंगत प्रावधानों को लिखित रुप में जिले के सभी थानों समेत वरीय अफसरों को उपलब्ध कराई जाती रही है। इसके बाबजूद भी पुलिसकर्मी अपने कर्तव्यों की लापरवाही से बाज नहीं आ रहे हैं।

किशोर न्याय परिषद ने बिहार थाना से दो टूक पूछा है कि किस परिस्थिति में कोशोर को हथकड़ी-बेड़ी के साथ किशोर न्याय परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। जबकि किशोर के उम्र के समर्थन में बिहार शरीफ आदर्श+2 विद्यालय द्वारा निर्गत जो प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया है, उसमें 1 जनवरी,2005 अंकित है। जबकि पुलिस अग्रसारण प्रतिवेदन में किशोर का उम्र 19 वर्ष दर्शाया गया है।

यही नहीं, आरोपी किशोर के संबंध में पुलिस द्वारा एसबीआर (सामाजिक पृष्ठभूमि प्रतिवेदन) भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। जबकि एसबीआर का प्रारुप जिले के सभी थानों में उपलब्ध करा दी गई है। यह किशोर न्याय अधिनियम-2016 के नियम 8(1) का उलंधन है।

प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र ने अपने आदेश में आगे लिखा है कि किशार न्याय परिषद में जब किशोर को प्रस्तुत किया गयातो उपास्थापित करने वाले पुलिस बल सादे लिवास में नहीं थे। वह पुलिस वर्दी में थी। यह किशोर न्याय अधिनियम-2016 के नियम 8(4) का स्पष्ट उलंघन है।

उपरोक्त तथ्यों के आलोक में स्पष्ट है कि पुलिस विधि द्वारा अधिरोपित अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन है तथा किशोर न्याय परिषद के आदेशों के प्रति घोर उपेक्षा एवं लापरवाही से कार्य करते हैं।

श्री मिश्र ने ऐसे पुलिस अफसर को तीन दिनों के भीतर किशोर न्याय परिषद में सदेह उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा है कि क्यों न उनके विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय एवं वरीय पुलिस अफसरों को कार्यवाही हेतु लिखा जाए। ती दिनों के भीतर पक्ष नहीं रखने की सुरत में न्याय परिषद एक पक्षीय कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है।  

  

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