नालंदा में शिक्षा का हालः कहीं 16 छात्र पर 5 शिक्षक तो कहीं 250 छात्र पर 2 शिक्षक

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नालंदा में दोनों प्रकार की स्थितियां मौजूद है। वह यह कि एक विद्यालय में बच्चे कम और शिक्षक अधिक तथा दूसरे विद्यालय में बच्चे अधिक और शिक्षक कम। ऐसे  में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता ‘न्याय के साथ विकास’ का प्रतिफलन किस रूप में संभव है, आप अंदाजा लगा सकते हैं।”

बिहारशरीफ (राजीव रंजन)।  बिहार के चौतरफा विकास की गारंटी का जिक्र करते हुए राज्य-सरकार समाज के सभी वर्गों के विकास की समरूपता के लिए प्रतिबद्ध है किंतु यह क्या एक ओर जहाँ मुख्यमंत्री के गृह जिला नालंदा स्थित राजगीर प्रखंड के अंतर्गत नवसृजित प्राथमिक विद्यालय बिशुनपुर में मात्र 16 विद्यार्थी नामांकित हैं एवं वहाँ शिक्षकों की संख्या 5 है। बच्चों की उपस्थिति 12-13 है, जो नालंदा विधानसभा क्षेत्र में अवस्थित है और जहाँ श्रवण कुमार ग्रामीण विकास संसदीय कार्य-मंत्री हैं एवं इसी क्षेत्र नालंदा विधानसभा से विधायक हैं।

इन हालातों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की परिकल्पना बेमानी है। “गौरवशाली स्वर्णिम बिहार है बनाना पर सकारात्मक सोच का कहीं न ठिकाना”।”शिक्षकों की बात भी तो है निराली, बगिया को काट रहा खुद माली”। 11 बजे लेट नहीं और 3 बजे भेंट नहीं। हाय रे! बिहार के शिक्षा की मर्यादा, क्या कहूँ अब ज्यादा।

गांव की गलियों में एक कहावत है अंधेर नगरी चौपट राजा बस यही हाल है बिहार सरकार के शिक्षा विभाग की। जहां शिक्षा खोज रहा अपने बचने का अस्तित्व कि लोग हमें शिक्षा के नाम से जाने मगर बिहार के छात्र-छात्राओं खुद अपने आप पर निर्भर करते हैं ना कि सरकारी शिक्षा, सरकारी विद्यालय और सरकारी शिक्षकों पर, राज्य सरकार शिक्षा के नाम पर 20% खर्च तो करती है वह भी केवल अधिकारियों और शिक्षा विभाग के सरकारी कर्मचारियों और शिक्षा माफियाओं का जेब गर्म करने के लिए।

सोचने की बात यह है कि शिक्षा इतना चौपट कि कहीं उच्च विद्यालयों में 200 विद्यार्थियों पर मात्र 2 शिक्षक कार्य करते हैं और कहीं नवसृजित प्राथमिक विद्यालय में 16 विद्यार्थियों पर 5 शिक्षक कार्य करते हैं, वह भी अबोध विद्यार्थियों के लिए।

“हाय रे शिक्षा तूने तो कमाल कर दिया बिहार के अधिकारियों को मालामाल कर दिया”। जहां विद्यालय खुलने का समय 9:30 बजे और बंद होने का समय 3:30 बजे रहता है वही शिक्षकों के लिए 11:00 बजे विद्यालय में आना लेट नहीं होता है और 3:00 बजे विद्यालय में उनसे भेंट नहीं हो पाता। ऐसे में शिक्षा को लेकर सवाल उठता है कि आखिर कब सुधरेगी बिहार के शिक्षा प्रणाली?

आज एक ऐसी तस्वीर पर नजर पड़ी जो सुशासन बाबू के गृह जिले नालंदा के पर्यटन नगरी राजगीर प्रखंड एवं ग्रामीण विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार के विधानसभा क्षेत्र नालंदा के भूइ पंचायत के विशुनपुर गांव की नवसृजित प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर है जहां विद्यालय में मात्र 16 बच्चे नामांकित हैं, वह भी अबोध बच्चे जो की आंगनबाड़ी में पढ़ने के लायक हैं।

अब सवाल उठता है कि कहीं शिक्षा विभाग इतना तो विकास नहीं कर गया कि किसी उच्च विद्यालयों में 200 छात्रों पर दो या तीन शिक्षक कार्यरत रहते हैं और कहीं नवसृजित प्राथमिक विद्यालय जहां से मात्र 16 छात्र नाम अंकित है और वहां 5 शिक्षक कार्यरत हैं। बच्चे को कैसे पढ़ाते होंगे?

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