नालंदा आयुद्ध निर्माणी के चौथे और पांचवें यूनिट से उत्पादन शीघ्रः रक्षा राज्य मंत्री

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नालंदा ( राम विलास )। बुधवार को भारत सरकार के रक्षा राज्य मंत्री डॉक्टर सुभाष भामरे ने नालंदा मेड एक लाखवा बीएमसीएस माड्ल राष्ट्र को समर्पित किया। 

राजगीर के आयुद्ध निर्माणी नालंदा में आयोजित समारोह में डा भामरे ने कहा कि आज का दिन नालंदा और भारत दोनों के लिए ऐतिहासिक है।

रक्षा राज्य मंत्री ने कहा नालंदा मेड बीएमसीएस मॉडल राष्ट्र को समर्पित करते हुए उन्हें गौरव अनुभव हो रहा है।  इसके लिए उन्होंने आयुध निर्माणी के पदाधिकारियों और वैज्ञानिकों को  बधाई दी।

उन्होंने कहा नालंदा का यह आयुध निर्माणी देश का अत्याधुनिक कारखाना है।  इस कारखाने के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी संवेदनशील है।

उन्होंने कहा कि  पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर परिकर और वर्तमान रक्षा मंत्री  निर्मला सीतारमण  इस आयुध कारखाना के प्रति काफी सजग हैं।

उन्होंने कहा कि 17 साल पहले देश के इस अत्याधुनिक आयुध कारखाना की नीव रखी गई थी। इस आयुध निर्माणी से लगातार बीएमसीएस  मॉडल का निर्माण किया  जा रहा है। यह राष्ट्र के सौभाग्य की बात है। चालू वित्तीय वर्ष में दो लाख बीएमसीएस बनाने का लक्ष्य है । 

उन्होंने कहा देश को स्वदेशी मेड बीएमसीएस  की बहुत जरूरत थी। जिसकी भरपाई आयुध निर्माणी नालंदा आरंभ करने लगा है।  उन्होंने कहा कि आयुध निर्माणी नालंदा में कुल 8 यूनिट स्थापित होना है। इनमें से वर्तमान समय में केवल  तीन  यूनिट  से ही  उत्पादन हो रहा है। इस कारखाने के दो यूनिट ( चौथा और पांचवां ) से उत्पादन शीघ्र होने वाला है। 

उन्होंने कहा कि सभी यूनिट को चालू कराने के लिए केंद्र सरकार की कोशिश जारी है । देश के आर्मी की मांग थी स्वदेशी बीएमसीएस की,  जिसका भरपाई नालंदा से हो रहा है। नालंदा  मेड  बीएमसीएस   मॉडल राष्ट्र को समर्पित करने से पहले केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री डॉक्टर  भामरे ने आयुध निर्माणी नालंदा का  निरीक्षण किया। 

उन्होंने प्रत्येक  यूनिट का  मुआयना किया और उसके बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की। इस दौरान  उन्होंने अधिकारियों के आवश्यक निर्देश भी  दिए। 

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री ने आयुध निर्माणी परिसर में पौधारोपण भी किया। उनके साथ आयुध निर्माणी कोलकाता बोर्ड के सदस्य और आयुद्ध  निर्माणी नालंदा के महाप्रबंधक शरद  घोड़के ने भी वृक्षारोपण किया । 

आयुध निर्माणी नालंदा के महाप्रबंधक शरद घोड़के ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आयुध निर्माणी नालंदा सीमित संसाधनों में रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है । 

उन्होंने कहा कि पहले  बीएमसीएस का विदेश से आयात किया जाता था। लेकिन यह मॉडल अब अपने देश में ही  आयुद्ध  निर्माण नालंदा खुद तैयार कर रहा है।

उन्होंने बताया कि  एक बीएमसीएस मॉडल खरीदने पर ₹19000 खर्च होते थे। स्वदेश में निर्माण होने पर इसका खर्च मात्र 14000 की प्रति माडल  आता है ।  इससे 5000 रुपये  प्रति बीएमसीएस मॉडल की बचत हो रही है।

उन्होंने कहा कि  अगर दो लाख बीएमसीएस मॉडल प्रतिवर्ष नालंदा में तैयार होता है तो देश को 100 करोड़ रुपए राजस्व की बचत होगी।  प्रधानमंत्री के मेड इन इंडिया का सशक्त  उदाहरण के रुप में  आयुद्ध निर्माणी नालंदा कार्य कर रहा है ।

उन्होंने कहा कि नालंदा मेड बीएमसीएस माडल का मारक क्षमता 5 से 35 किलोमीटर है । इसका इस्तेमाल बोफोर्स तोप में किया जाता है।

उन्होंने  कहा कि  बीएमसीएस बनाने वाला नालंदा देश का एकलौता आयुध निर्माणी है। रक्षा के क्षेत्र में  नालंदा ने जो राह देश को दिखाया है । उससे रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने में सहूलियत होगी।

इस अवसर पर आयुध निर्माणी कोलकाता बोर्ड के सदस्य सौरभ कुमार,  नालंदा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफ़ेसर सुनैना सिंह,  सैनिक स्कूल के प्रिंसिपल कर्नल  आई एम हुसैन,  वर्द्धमान आयुर्विज्ञान संस्थान पावापुरी के प्रिंसिपल डॉक्टर जे के दास  समेत अनेक प्रमुख लोग मौजूद थे। निर्माण के अपर महाप्रबंधक एन के गुप्ता ने  धन्यवाद ज्ञापन किया।

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