नालंदाः महज दो साल पहले करोड़ों की लागत से शुरु सूबे का पहला नीरा प्रोजेक्ट धारशाही😮

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“मार्च 2017 में 10 हजार लीटर क्षमता वाले इस प्लांट को स्थापित किया गया था।  इस योजना पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए गए। उम्मीद किया था कि तार और खजूर के पेड़ से जुड़े लोगों को रोजगार मिलेगा और इस व्यवसाय से जुड़े लोग अपना व्यवसाय कर पाएंगे….”

✍बिहारशरीफ से  दीपक विश्वकर्मा की एक्सलूसिव रिपोर्ट ✍

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क । बिहार में पूर्ण नशाबंदी लागू कराने के उद्देश्य से बिहार सरकार के उद्योग विभाग द्वारा  नालंदा में शुरू की गई सीएम नीतीश कुमार की अति महात्माकांक्षी नीरा योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। दो वर्ष पूर्व करोड़ों रूपए की लागत से शुरू किये गए सूबे का पहला नीरा प्लांट योजना पूरी तरह धराशाई हो गई है।

नालंदा नीरा प्लांट में शुरुआती दौर से आज तक यहां किसी तरह का प्रोसेसिंग नहीं हुआ है।  बिहार शरीफ के बाजार समिति में बनाए गए करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित नीरा प्लांट आज बंद होने के कगार पर खड़ा हो चुका है।

ताड़ और खजूर के पेड़ से निकलने वाले ताजे रस (ताड़ी) को इस प्लांट के माध्यम से पैकेजिंग के बाद बाजार में बेचने के लिए नालंदा में 51 सेलिंग प्वाइंट भी बनाए गए थे, लेकिन आज सभी सेलिंग प्वाइंट बंद हो चुके हैं।

जीविका समूह द्वारा के द्वारा जिले के विभन्न क्षेत्रो से ताड़ी संग्रह कर इस नीरा प्लांट में आपूर्ति करना था, मगर जीविका समूह ने ताड़ी आपूर्ति करने में अपने हाँथ खड़े कर दिए जिससे इस प्लांट में ताड़ी नहीं पहुंच रहा है। जिसके कारण यहां काम करने वाले लोग को हटाया जा रहा है।

यही नहीं  ताड़ी और खजूर के पेड़ से जुड़े लोग नीरा बेचने का लाइसेंस भी दिया गया। नालंदा जिले में करीब 800 लोगों को इसका लाइसेंस भी निर्गत किया गया।  कुछ दिनों की सख्ती से इस प्लांट में ताड़ी आपूर्ति की गयी। वह भी केवल टेस्टिंग के लिया। अब वह भी बंद हो चुका  है।

लेकिन 2 वर्षों के बाद यह बड़ा उद्योग दम तोड़ता नजर आ रहा है।  जबकि इस प्लांट के लिए एसएफसी के गोदाम को प्रति माह चार लाख रूपए किराये पर लिया गया है इसमें प्रति माह 50 बिजली का बिल और कर्मियों के ऊपर साढ़े तीन लाख रूपए आज भी खर्च किये जा रहे हैं। यानि प्रति माह आठ लाख रूपए उद्योग विभाग को चूना  लग रहा है।

इस प्लांट के नियंत्रण का प्रभार नेफेड को दिया गया है, जिनके पदाधिकारी के द्वारा इस प्लांट की मोनेटरिंग की जा रही है।  इधर कम्फेड के टेक्निकल अफसर आर के रमन प्लांट में ताड़ी नहीं आपूर्ति किये जाने के लिए मौसम को दोषी ठहराते हुए ताड़ी उत्पादन की कमी बता रहे हैं।

जबकि प्रोजेक्ट मैनेजर जगत नारायण सिंह इसके लिए सीधे तौर पर सरकार और विभाग की उदासीनता बताते हैं। यानि सीधे तौर पर यह कहा जाये कि बिहार में पूर्ण नशाबंदी के लिए शुरू किये गए इस योजना में सरकार पूरी तरह विफल नजर आ रही है।

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