नाबालिग छात्रा की थाने में शादी मामले के सभी आरोपी आज़ाद कैसे !

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“राज्य बाल संरक्षण आयोग ने सरकार और डीजीपी को सौंपे अपने आठ पन्नो के रिपोर्ट में साफ जिक्र किया है कि मामले में सरायकेला पुलिस- प्रशासन और छात्रा के परिजन दोषी हैं…..”

सरायकेला (वीरेन्द्र मंडल)। जिले के राजनगर थाना परिसर में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के कक्षा नौवीं की छात्रा की शादी मामले में सरायकेला पुलिस और प्रशासन के साथ आरोपियों की कौन सी खिचड़ी पकी कि मामले के सभी आरोपी खुले में घूम रहे हैं?

जबकि राज्य बाल संरक्षण आयोग ने सरकार और डीजीपी को सौंपे अपने आठ पन्नो के रिपोर्ट में साफ जिक्र किया है कि मामले में सरायकेला पुलिस-प्रशासन और छात्रा के परिजन दोषी हैं।

फिर आखिर क्या वजह है कि मामले से जुड़ा एक भी आरोपी पुलिस के गिरफ्त से बाहर है! तो क्या आरोपी थानेदार यज्ञ नारायण तिवारी, एएसआई अनिल ओझा, छात्रा का चाचा नरेराम महतो, चाची मेमबती महतो सभी को दोषमुक्त माना जाए?

क्या बाल संरक्षण आयोग की रिपोर्ट महज़ खानापूर्ति समझी जाए! सवाल उठना लाजिमी है।

एक आंख में काजल और एक आंख में शूरमाः सवाल बड़ा है, क्योंकि पिछले दिनों 14 मार्च को इसी जिले के सरायकेला थाना क्षेत्र में भी एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया था, जिसमें सरायकेला पुलिस और जिला बाल संरक्षण विभाग ने एक नाबालिग की जबरन शादी कराने के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए नाबालिग के पिता, मां और भाई को जेल भेजा था। वहीं राजनगर के मामले में जिले के अधिकारियों ने आखिर चुप्पी क्यों साध रखा है।

राज्य बाल संरक्षण आयोग किस काम काः ऐसे में अब निगाहें राज्य बाल संरक्षण आयोग के उस रिपोर्ट पर टिक गई है जिसमें आयोग ने मामले की पड़ताल के बाद पूरे प्रकरण को सत्य पाया था और दोषियों पर कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए राज्य पुलिस महानिरीक्षक नोटिस किया था और राज्य सरकार को सूचित किया था।

अब कयास लगना स्वभाविक है कि आयोग और बोर्ड महज़ खानापूर्ति है। अधिकारियों में ऐसे किसी आयोग का खौफ नहीं, चाहे मानवाधिकार आयोग हो या महिला-बाल संरक्षण आयोग।

मुख्यमंत्री के निर्देश को भी धत्ता बता दिया अधिकारियों नेः सवाल फिर वही उठ रहा है कि झारखंड में अधिकारियों को आखिर किसका खौफ है। क्या राज्य के अधिकारी बेलगाम हैं ? नए साल के मौके पर अपने जमशेदपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बड़ी- बड़ी बातें कहीं। राज्य के खुशहाली का पूरा ब्लू प्रिंट मिडियकर्मियों के सामने विस्तार से रखा।

उसी दौरान राजनगर कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में नाबालिग छात्रा की थाने में शादी कराए जाने के मामले पर भी मुख्यमंत्री का ध्यानाकर्षण कराया गया।

तब मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा था कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और तत्काल जमशेदपुर उपायुक्त को मामले पर सरायकेला उपायुक्त से रिपोर्ट तलब करने का निर्देश दिया।

अब चार महीने बीत चुके हैं। मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में क्या समझा जाए, ये समझ से परे है।

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