दिल्ली MCD में  चुनाव जीतने को इस तरह बूथ मैनेजमेंट कर रहे हैं नेता

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नई दिल्ली (विशेष संवाददाता)। चुनाव प्रचार खत्म होते ही सभी कैंडिडेट बूथ मैनेजमेंट में जुट गए हैं। रविवार को एमसीडी चुनाव के लिए वोटिंग होनी है। इससे पहले बूथ मैनेजमेंट के लिए नेता कई तरह के जुगाड़ कर रहे हैं। इस बार जबर्दस्त गर्मी होने के कारण नेताओं को पोलिंग बूथ के बाहर टेबल पर बैठने वाले लोग नहीं मिल रहे हैं। जो मिल रहे हैं वे पहले से ज्यादा पैसों की डिमांड कर रहे हैं। कुछ कैंडिडेट्स ने तो प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए लोगों का इंतजाम किया है।

काफी सारे कैंडिडेट्स ने तड़के सुबह वोटरों के घरों में पेन का सेट, ब्यूटी किट (जिसमें लिपस्टिक, नेल पेंट, नेल कटर जैसी तमाम चीजें का एक पैकेट बनाया है) भेजने का प्लान तैयार किया है।

लोगों के घरों तक भेजने के काम में केबल ऑपरेटरों के उन लड़कों को लगाया है जो लोगों से कलेक्शन के लिए जाते हैं। कई कैंडिडेट ऐसे भी हैं जो कूलर भेज रहे हैं। शर्त यह है कि अगर किसी के पास 25 वोटर हैं तो उसके यहां कूलर भेज दिया जाएगा।

पोलिंग बूथ के लिए कैंडिडेट दो एजेंट तैनात करते हैं। एक एजेंट पोलिंग बूथ के अंदर होता है और एक उसका रिलीवर होता है। इन एजेंटों को एक पोलिंग बस्ता मुहैया कराया जाता है।

इन पोलिंग एजेंटों को नेता 500 से लेकर 5000 रुपये तक देते हैं। ये पैसे दोनों आपस में बांट लेते हैं। पोलिंग बूथ में एजेंट को वोटर लिस्ट, एजेंट फॉर्म, पेपर, पैन, पोलिंग एजेंट अपॉइंटमेंट फॉर्म, काउंटिंग शीट, कैंडल, लाख, सील, वोट को चैलेंज करने के लिए 2 रुपये के सिक्के 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक दिए जाते हैं।

हर कैंडिडेट खाने का इंतजाम करने वाली भी एक टीम का इंतजाम करता है। यह टीम पोलिंग एजेंट और पोलिंग स्टेशन के बाहर बैठे कार्यकर्ताओं के लिए सुबह नाश्ते का इंतजाम, दोपहर में खाने का इंतजाम और शाम के वक्त चाय का इंतजाम करती है। इस खाने के लिए एरिया के हलवाइयों से संपर्क कर लिया गया है।

कुछ कैंडिडेट एक से ज्यादा वोट डालने के लिए एक ऐसे दस्ते का गठन करता है जो वोटिंग के लिए लगाई गई स्याही को मिटाते हैं। स्याही को मिटाने के लिए आंखा के दूध का इस्तेमाल किया जाता है। उसे लगाने के कुछ ही सेंकेंड में स्याही का निशान मिट जाता है।

आजकल बाजार में स्याही के निशान मिटाने के केमिकल भी आ गई हैं। बूथ मैनेजमेंट से जुड़ा दस्ता उस केमिकल को अपने पास रखता है। कई ऐसे वोटर होते हैं जो दो या तीन बार वोट डालते हैं। बार बार स्याही मिटाकर यह दस्ता वोट डलवाता है। ये जितनी रिस्क उठाते हैं, उन्हें उतनी ही गुणा में लाभ मिलता है।

कुछ कैंडिडेट ऐसे भी दस्ते तैनात करते हैं जो कैश लेकर एरिया में घूमते रहते हैं। तमाम इलाकों में एक एक मकान में मजदूरी करने वाले 50 से 100 तक लोग रहते हैं। इन वोट को कैश करने वाले इन सबके फोटो वोटर आई कार्ड लेकर नेताओं के इस दस्ते से संपर्क करते हैं। यह दस्ता कैश लेकर घूमता रहता है और कैश के बदले वोट खरीद लेता है।

कुछ नेता ऐसे भी होते हैं जो पोलिंग बूथ पर तैनात अफसरों और पुलिस के लोगों की रात भर खातिरदारी करते हैं। उनके खाने का इंतजाम से लेकर रहने तक का भी इंतजाम कर देते हैं। ताकि उनके फेवर में काम कर सके।

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