झारखंड के संयुक्त स्वास्थ्य सचिव के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के आदेश

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dsp report (1)-मुकेश भारतीय-

रांची। सहायक पुलिस अधीक्षक कोतवाली ने संचिका गायब हो जाने के मामले में संयुक्त स्वास्थ्य सचिव मनोज कुमार के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यह मामला उस समय का है, जब मनोज कुमार रांची के एसडीओ थे।

सहायक पुलिस अधीक्षक ने अपने कार्यालय ज्ञापांकः780/16 के जरिए अनुसंधानकर्ता सह कोतवाली थाना प्रभारी को दिए निर्देश में लिखा है कि तात्कालीन सदर उप समाहर्ता भूमि सुधार राजदीप संजय जॉन ने कार्यालय से संचिका गायब होने को लेकर अज्ञात के विरुद्ध भादवि धारा 379 के तहत 26 अक्टूबर,2010 को कांड संख्या-766 दर्ज कराया था। इस कांड को अविशेष प्रतिवेदित की श्रेणी में रखा गया था। तात्कालीन अनुसंधानकर्ता कैलाश प्रसाद यादव के अनुसंधान के क्रम में उक्त संचिका को बरामद नहीं किया जा सका और संचिका गायब या चोरी होने की दशा में भादवि की धारा 379 के तहत 31 दिसंबर,10 को सत्य सूत्रहीन प्रतिवेदन समर्पित किया गया।

उल्लेखनीय है कि अतिक्रमण से संबंधित संचिका 3/08 अपर चुटिया निवासी हरि प्रसाद अग्रवाल से संबंधित था। अग्रवाल के प्रोटेस्ट परिवाद सं.-1773/12 के आलोक में रांची मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी द्वारा पारित आदेश में इस कांड का पुनः अनुसंधान शुरु करने का निर्देश दिया गया। इस पर पुलिस उप महानिरीक्षक द्वारा पारित आदेश के आलोक में नगर पुलिस अधीक्षक के आदेशानुसार कांड का पुनः अनुसंधान करने का निर्देश निर्गत किया गया और इसे विशेष प्रतिवेदित कांड घोषित करते हुए पर्यवेक्षण करने का निर्देश मिला। उसके बाद तात्कालीन पुलिस उपाधीक्षक रणबीर सिंह ने संचिका किसके द्वारा और किस उद्देश्य से गायब किया गया, इस संबंध में और अधिक साक्ष्य संकलन करने के पश्चात ही अभियुक्तिकरण पर निर्णय लेना श्रेयकर समझा।

अनुसंधानकर्ता ने रांची अनुमंडालाधिकारी को आवेदन समर्पित करते हुए संचिका 3/08 उपलब्ध कराने का अनुरोध किया ताकि संचिका के गुम हो जाने के जिम्मेवार लोगों की पड़ताल हो सके। परन्तु अनुमडल कार्यालय द्वारा न तो संचिका उपलब्ध कराई गई और न ही संचिका गुम होने के दोषी व्यक्ति का नाम ही बताया गया।

उसके बाद उप समाहर्ता भूमि सुधार विभाग के प्रशाखा पदाधिकारी से पता चला कि वर्ष 2010 में अनुमंडल कार्यालय में उक्त संचिका को भेजा गया था और वहीं से गुम हो गया। इस प्रशाखा में तात्कालीन उप समाहर्ता के पद पर कार्तिक प्रभाष थे, जो वर्तमान में विजीलेंस डायरेक्टर कृषि बाजार समिति के पद पर कार्यरत हैं। त्तपश्चात तात्कालीन उप समाहर्ता भूमि सुधार कार्तिक कुमार प्रभाष से बयान लिया गया। उन्होंने बताया कि वे अपने पद पर वर्ष 2007 में पदास्थापित थे। उस समय रांची सदर अनुमंडलाधिकारी के पद पर मनोज कुमार कार्यरत थे। बाद में मनोज कुमार रांची नगर निगम के मुख्य कार्पालक पदाधिकारी के पद पर कार्यरत रहे और वर्तमान में संयुक्त सचिव स्वास्थ्य विभाग नेपाल हाउस रांची के पद पर कार्यरत हैं। भूमि सुधार उप समाहर्ता रांची के पद पर रहते हुए अपर चुटिया में अतिक्रमण हटाने से संबंधित संचिका 3/08 कार्वाही के अधीन था। तथा पुलिस बल एवं दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति कराने हेतु उक्त संचिका को प्रधान सहायक सुरेन कुमार तामंग द्वारा अनुमंडलाधिकारी मनोज कुमार के समक्ष उपस्थित किये गये थे और संचिका को उन्होंने अपनी टेबुल पर रख लिया था। उस समय वादी हरि कुमार अग्रवाल भी अनुमंडाधिकारी के सामने बैठा था।

इस प्रकार प्रश्नगत संचिका तात्कालीन अनुमंडलाधिकारी मनोज कुमार के टेबुल पर उपस्थापन के बाद ही गायब होने बात सामने आ रही है, जिसकी जबाबदेही सिर्फ उन्हीं की बनती है। अतएव तात्कालीन अनुमंडलाधिकारी मनोज कुमार के विरुद्ध ही यह कांड सत्य मान कर अनुसंधान किया जाना श्रेयकर प्रतीत होता है।

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