जदयू नेता की थाना में हत्या के इस खुलासे के बाद संदेह घेरे में नालंदा एसपी

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वेशक महादलित समाज के जदयू नेता गणेश रविदास ने फांसी नहीं लगाई थी। पुलिस हिरासत में उसकी मौत निर्मम पिटाई से हुई थी। लेकिन नालंदा एसपी ने प्रारंभिक तौर पर ही उसे सुसाइड करार देकर मामले को दबाने की हर संभव कोशिश की। दैनिक भास्कर ने आज अपने बिहारशरीफ संस्करण के पहले पन्ने पर एक जबर्दस्त खुलासा किया है……..

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के नगरनौसा थाना पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए जदयू नेता की मौत गुरुवार को हो गई थी। मौत के बाद पुलिस की ओर से दावा किया गया था कि अधेड़ ने थाने के शौचालय में फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली। इस मामले में प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट में स्पष्ट है कि लटकने से मौत नहीं हुई है, जो पुलिस की खुदकुशी थ्योरी को गलत साबित कर रही है। इसके अलावा शरीर के कई स्थानों पर जख्मों के भी निशान मिले हैं।

जिससे पीड़ित परिवार के थर्ड डिग्री से हत्या के आरोपों को बल मिल रहा है। तीन डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया था, जिसका बिसरा जांच के लिए पटना भेजा गया है। रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटने की आशंका व्यक्त की गई है।

पूरक रिपोर्ट बिसरा जांच के बाद आएगा। तब मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। हिरासत में मौत की अगली सुबह परिजन व नागरिकों ने नगरनौसा थाने का घेराव कर हंगामा किया था।

जिसके बाद मृतक के पुत्र ने थानेदार, जमादार समेत कुल 9 लोगों को आरोपित कर एससीएसटी थाने में दर्ज कराई थी। सभी पर हत्या और एससीएसटी की धारा लगी।

इसके बाद थानाध्यक्ष, जमादार और एक चौकीदार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस की मुश्किल बढ़ा दी है। कई और अधिकारी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। 

हाजत में मौत होने के बाद पुलिस बोली थी- गणेश ने खुदकुशी की है
बीते 11 जून को एक किशोरी का अपहरण हो गया था। जिसकी एफआईआर परिजन ने एक युवक को आरोपित कर दर्ज कराई थी। बुधवार की शाम पुलिस सैदपुर गांव निवासी देवनंदन रविदास के पुत्र जदयू के महादलित प्रकोष्ठ के प्रखंड अध्यक्ष गणेश रविदास को पूछताछ के लिए थाने लाई। जहां गुरुवार की रात उनकी मौत हो गई।

घटना के बाद नालंदा पुलिस ने चुप्पी साथ ली। घंटों बाद बताया गया कि अधेड़ ने शौचालय में फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली। परिजन व ग्रामीण खुदकुशी के दावे पर सवाल उठाते हुए थर्ड डिगी से पुलिस पर हत्या का आरोप लगाने लगे।

घटना के अगले दिन उग्र लोगों ने थाने का घेराव कर पुलिस कर्मियों पर रोड़ेबाजी करते हुए सड़क जाम कर आगजनी की। जिसके बाद आईजी, डीआईजी नगरनौसा पहंचे। वरीय अधिकारियों की मौजूदगी में मृतक के पुत्र बलराम दास ने एससीएसटी थाने में थानेदार, जमादार समेत 9 लोगों को आरोपित कर केस दर्ज कराई।

सभी पर हत्या और एससीएसटी धारा लगी। इसके बाद थानेदार कमलेश कुमार , जमादार बलिन्द्र राय, चौकीदार संजय पासवान को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। 
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से परिजन के आरोपों को बल 
सूत्रों की मानें तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट है कि लटकने से मौत नहीं हुई है। शरीर के कई स्थानों पर इंज्यूरी भी है। जिससे पिटाई से हत्या के आरोपों को बल मिल रहा है।

दर्ज एफआईआर में मृतक के पुत्र ने आरोप लगाया है कि अपहरण मामले में पुलिस 10 जुलाई की शाम उनके पिता को पूछताछ के लिए थाने ले गई। अगली सुबह परिवार के लोग थाना गए तो मिलने नहीं दिया गया।

बताया कि पुलिस उनके पिता को लेकर अपहृता की बरामदगी के लिए गई है। इसके बाद गुरुवार की रात चौकीदार ने आकर बताया कि उनके पिता की मौत हो गई है। शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान थे।

सिर- केहूनी और एड़ी से खून बह रहा था। नाभी काला था और पेट फूला था। थाने में पिटाई से उनके पिता की मौत हुई है। पांच ग्रामीणों के कहने पर पुलिस ने उनके की पिटाई की। 

बाल संरक्षण गृह भेजी गईं नगरनौसा मामले की अपहृता 
नगरनौसा मामले की अपहृता फिलहाल बाल संरक्षण गृह में रहेगी। ये आदेश सोमवार को प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी सुनील कुमार सिंह ने दिया है।

अधिवक्ता रंजीत कुमार ने बताया कि शनिवार को पुलिस द्वारा कोर्ट में बयान के बाद अपहृता को मेडिकल जांच के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल भेजा गया था। मेडिकल टेस्ट में शामिल डॉक्टरों की टीम द्वारा अपहृता की उम्र 17 से 18 वर्ष के बीच बतायी गयी।

मेडिकल रिपोर्ट के साथ अपहृता को पुलिस द्वारा प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी के कोर्ट में उपस्थापित कराया गया। कोर्ट से अपहृता ने घर जाने से साफ तौर पर इन्कार कर गयी।

अपहृता द्वारा उस लड़के तथा उनके परिवार का नाम लिया गया, जिस पर अपहरण का आरोप लगा है। अपहृता को बाल संरक्षण इकाई भेजने का आदेश दिया।

 पुलिस ने लटकने से मौत की जो फोटो वायरल की वही बयां कर रहा सच्चाई 
जदयू नेता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट कई सवाल पैदा कर रही है। सूत्रों की मानें तो डॉक्टरों की टीम ने रिपोर्ट में लिखा है कि फांसी से मौत के साक्ष्य नहीं मिले हैं।
मृतक के परिजन ने बताया कि शव की खिड़की में लटकी तस्वीर वायरल करने का मकसद साक्ष्यों को छुपाना था।

आदेश की अवहेलना में दारोगा सस्पेंड:  नगरनौसा कांड में अब भी कई अधिकारी रडार पर है। इस मामले में थाने के दारोगा अरुण कुमार सिन्हा को सस्पेंड कर दिया गया है। हिरासत में मौत के बाद दारोगा ने वरीय अधिकारी के आदेश की अवहेलना की थी। मुख्यालय के आदेश पर कार्रवाई हुई।

 उठ रहा सवाल, आखिर क्यों इतनी दबाव में थी पुलिस : इलाके में लोग इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर पुलिस इस मामले में क्यों इतने अधिक दबाव में थी कि नियम कानून को ताख पर रखकर पेश आ रही थी।

लोगों के अनुसार लड़की के अपनी मर्जी से जाने की पूरे इलाके में चर्चा थी। फिर भी आरोपी नहीं होने के बावजूद गणेश रविदास का उठाकर लाया गया। मृतक के पुत्र बालवीर कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट की चर्चा उनके कानों तक भी आई है।

उनके पिता खुदकुशी नहीं कर सकते, पिटाई कर उनकी हत्या की गई है। पिता को दो बेटियों को शादी करनी थी। एक बहन की शादी नवंबर माह में था। दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।

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