चिकित्सा क्षेत्र के रीढ़ होते हैं ग्रामीण मेडिकल प्रैक्टिशनर

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नालंदा ( राम विलास)। ग्रामीण मेडिकल  प्रैक्टिशनर चिकित्सा क्षेत्र के  रीढ़ होते हैं। गांव में कोई बीमार होता है तो उसके इलाज के लिए ग्रामीण प्रैक्टिशनर के अलावे कोई सहारा नहीं होता है। इन्हें और कुशल और योग्य बनाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रशिक्षण देने की जरूरत है।

जन जीवक संघ की ओर से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र राजगीर में ग्रामीण मेडिकल प्रैक्टिशनरो के राज्य स्तरीय सम्मेलन में रविवार को वक्ताओं ने यह कहा। सम्मेलन का उद्घाटन का उद्घाटन ह्रदय रोग विशेषज्ञ डा बीबी भारती ने दीप जलाकर किया।

सम्मेलन के मुख्य  अतिथि  बिहारशरीफ के भाजपा विधायक डॉक्टर सुनील कुमार ने कहा कि ग्रामीण मेडिकल प्रैक्टिशनर मरीजों का प्राथमिक इलाज न करें तो उनके हालत और गंभीर हो सकते हैं। गांव में कोई बीमार होता है तो आरएमपी के अलावा कोई दूसरा सहारा नहीं होता है।

उन्होंने चिकित्सकों के सम्मान में हो रहे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले के चिकित्सकों और आज के चिकित्सकों के मान सम्मान में  आसमान जमीन का अंतर दिखता है। पहले चिकित्सकों का सम्मान समाज में बहुत ज्यादा होता था। लेकिन वर्तमान में वह सम्मान तेजी से घटते जा रहा है। इसका मूल कारण  चिकित्सा  का व्यवसायीकरण होना है।

उन्होंने मेडिकल प्रैक्टिशनरो से कहा कि इस गिरावट को रोकने के लिए वे आगे आएं हैं। उन्होंने कहा कि आज डॉक्टरी  पेशा बदनाम हो रहा है। डॉक्टर करने में लज्जा और बदनामी हो रही है।

उन्होंने कहा कि मैं भी डॉक्टरी करता था। लेकिन वह व्यावसायिक नहीं, सेवा भावना से करता था। 20 शुल्क लेता था। सप्ताह में दो दिन सोमवार और शुक्रवार को नि:शुल्क इलाज करता था।

डॉक्टर सुनील कुमार ने ग्रामीण मेडिकल प्रैक्टिशनरो की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह चिकित्सीय प्रशिक्षण के साथ जीवन जीने का भी प्रशिक्षण अवश्य लें। जीवन ऐसे जिए कि शिकायत होने पर दुश्मन भी नाराजगी व्यक्त करें।

उन्होंने कहा कफन में पॉकेट नहीं होते हैं। आज तक मरने वाला कोई भी व्यक्ति अपने साथ धन नहीं ले गया  है। इसलिए बदनामी से बचना चाहिए।

उन्होंने कहा समाज को स्वस्थ रखने के लिए डॉक्टरों की तरह ग्रामीण मेडिकल प्रैक्टिशनरो की भी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उनकी जितनी भी तारीफ की जाए वह कम होगी।

विधायक ने कहा कि 45 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद शरीर के विभिन्न अंगों की बीमारियों का रिजर्वेशन शुरू हो जाता है।

डॉ श्याम नारायण आर्य की  की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जितना वह चिकित्सा के क्षेत्र में अनुभव  और जानकारी  रखते  हैं,  उतना आज के नौजवान  चिकित्सक भी नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा चिकित्सक हो या ग्रामीण मेडिकल प्रैक्टिशनर जीवन के हर क्षण सीखने का प्रयास करना चाहिए।

इस अवसर पर जन जीवक संघ द्वारा दर्जन भर ग्रामीण मेडिकल प्रैक्टिसनरो को उत्कृष्ट योगदान के लिए मेडल देकर सम्मानित किया गया। डॉक्टर सियाशरण प्रसाद के द्वारा मेडल  प्रदान किया गया।

सम्मान पाने वालों में डॉ नवीन, डॉ विकास, डॉ देवेंद्र, डॉ ओम प्रकाश, डा  प्रहलाद, डॉ राजेंद्र भारती एवं अन्य शुमार नाम हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर बीवी भारती, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर चंदेश्वर प्रसाद, सर्जन डॉ राजीव नयन, आंख, नाक, गला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अरुण कुमार, डॉ सियाशरण प्रसाद, डॉ डी एन वर्मा, डॉ उर्मिला सिंह, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजीव रंजन प्रसाद, दंत चिकित्सक डॉक्टर अनिल कुमार द्वारा ग्रामीण मेडिकल प्रैक्टिशनरो को प्राथमिक उपचार से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया।

ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर अरुण कुमार ने कहा पंजाब और हरियाणा में सइनेशस के मरीज अधिक पाए जाते हैं। इसका कारण खेतों में पुवाल  और गेहूँ के डंठल को जलाना बताया।

विधायक रवि ज्योति कुमार ने आरएमपी के कार्यों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में सरकारी चिकित्सक नहीं जा सकते हैं। लेकिन हर गांव जा कर आर एम पी चिकित्सक इलाज करते हैं।

समारोह के अध्यक्ष एवं संघ के प्रदेश महासचिव डॉ विपिन कुमार सिन्हा ने कहा कि ग्रामीण मेडिकल प्रैक्टिशनर गांवों में सस्ती व प्राथमिक चिकित्सा कर काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।

उन्होंने आयुष चिकित्सकों के वेतन वृद्धि की प्रशंसा करते हुए कहा कि गांव में प्राथमिक चिकित्सा करने वाले आरएमपी को प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया जाना चिंता का विषय है।

इस सम्मेलन में नालंदा, नवादा, गया, पटना, शेखपुरा, लखीसराय, जमुई एवं अन्य जिलों के अलावे झारखंड से भी कई ग्रामीण मेडिकल प्रैक्टिशनर शामिल हुए। राजगीर नगर पंचायत के वरिष्ठ वार्ड पार्षद एवं ग्रामीण मेडिकल प्रैक्टिशनर डॉक्टर अनिल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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