गृद्धकूट पर्वत पर करोड़ों की ठगी कारोबार में संदिग्ध रही डीएम-एसपी की भूमिका

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वर्तमान में पदस्थ डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम और  एसपी सुधीर कुमार पोरिका के समक्ष भी यह अहम सवाल है और इसकी उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता है……”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज। नालंदा जिले के अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल राजगीर के गृद्धकूट पर्वत पर भगवान बुद्ध की मूर्ति की आड़ में लंबे अरसे तक बड़े पैमाने पर हुए करोड़ों ठगी-वसूली के ‘खेल’ में डीएम-एसपी स्तर के अफसर की भूमिका काफी संदिग्ध रही है।

यह हम नहीं कहते, बल्कि यह पटना हाई कोर्ट में दाखिल जिला प्रशासन का शपथ पत्र और उस पर पटना हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी के साथ बिहार आर्थिक अपराध विभाग के एसपी स्तर के अधिकारी द्वारा डीएम-एसपी को सीधे लिखे पत्र खुलासा करती है।

पटना हाई कोर्ट में दाखिल सिविल वाद संख्या-21226/14 में एक वादी वनाम महानिशेक, पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग (नई दिल्ली), पुरातत्व अधीक्षक, पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग (पटना), जिलाधिकारी (नालंदा), पुलिस अधीक्षक (नालंदा) मामले में माननीय मुख्य न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह ने 08.12.2015 को महत्वपूर्ण ओरल जजमेंट दिया था।

उस जजमेंट में नालंदा के जिला पदाधिकारी का पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के हवाले से दायर शपथ पत्र का साफ उल्लेख है। शपथपत्र के अनुसार गृद्धकूट पर्वत पर किसी तरह की कोई ठगी या वसूली का सबाल ही नहीं उठता, क्योंकि उसकी परिधि में स्थाई तौर से 4-16 यूनिट बीएमपी के जवान तैनात हैं और गृद्धकूट पर्वत पर नजर रखने के लिये 16 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इस तरह वहां पूर्ण निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था कायम है।

हांलाकि यह दीगर बात है कि तब या अब जिन स्थानों पर 16 सीसीटीवी कैमरे लगे होने की बात कही गई, वहां एक भी कैमरे न लगाए गए थे और न ही अभी लगे हैं। 4-16 यूनिट बीएमपी जवान कहां तैनात रहे? कहीं उसी की अभिरक्षा में प्रशासनिक मिलिभगत से नालंदा की धरती को दुनिया भर में शर्मसार तो नहीं किया जाता रहा?

हाई कोर्ट ने दाखिल काउंटर शपथपत्र के आलोक में नालंदा डीएम-एसपी को सख्त लहजे में गृद्धकूट पर्वत पर कड़ी निगरानी रखने और समसय समय पर भौतिक निरीक्षण करते रहने की हिदायत दी थी और कहा था कि अगर सुरक्षा-निगरानी के इंताजामात नहीं हैं तो आवश्यक तौर पर सुनिश्चित की जाए।

उधर, बिहार आर्थिक अपराध ईकाई के पुलिस अधीक्षक, पटना ने अपने कार्यालय पत्रांक-4723, दिनांकः 23.09.2015 द्वारा नालंदा डीएम-एसपी को “राजगीर विश्व शांति स्तूप के पैदल मार्ग अवस्थित गृद्धकूट पर्वत पर पूजा पाठ के नाम पर सरकार को बदनाम करने की चल रही साजिश” विषयगत जांच-कार्रवाई को लिखा था। लेकिन इस पत्र के आलोक में कभी कोई जांच की गई और न ही कोई कार्रवाई की गई।

अब सवाल उठता है कि गृद्धकूट पर्वत पर यदि 4-16 यूनिट बीएपी जवान स्थाई तौर पर तैनात रहे और 16 सीसीटीवी की चौतरफा निगरानी रही तो फिर नालंदा की भूखमरी, बदहाली आदि के नाम पर देशी-विदेशी पर्यटकों से ठगी-वसूली कैसे होती रही? यह माननीय उच्च न्यायालय के साथ सामने यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

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