गजब! छः माह बाद पेश होगा राजगीर नगर पंचायत का बजट !

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यूँ तो नगर निकायों के स्वतंत्र बोर्ड और अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिये नगर विकास विभाग रोज विभागीय निर्देश जारी करती है लेकिन जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का…………….”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क।  बजट का नाम सुनते ही लोग समझ जाते है कि फरवरी मार्च में केंद्र से लेकर राज्य सरकार अपना बजट पेश कर योजनाएं क्रियान्वयन करती है, लेकिन नालंदा जिले का राजगीर नगर पँचायत बिहार का एक ऐसा स्वतंत्र बोर्ड है, जो साल के छः महीने बीतने पर 2019-20 के बजट पर चर्चा के लिए आज 5 सितम्बर को राजगीर नगर पंचायत बोर्ड की बैठक बुलाई है।

वित्तिय व्यवस्था और लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाते हुए राजगीर नगर पँचायत द्वारा पत्रांक 2050 द्वारा सूचना नालन्दा के सांसद,विधायक, विधान पार्षद सहित नगर के सभी बार्ड पार्षदों को सूचना उपलब्ध कराई गई है।

नगर निकाय वैसे तो फरवरी मार्च में ही अपना सालाना बजट पेश कर आय व्यय के ब्यौरे पेश करती है और बोर्ड से पारित कराकर योजनाएं क्रियान्वयन कराती है। लेकिन राजगीर नगर पंचायत साल के छः महीने बीतने पर जब बजट पर चर्चा करे तो मामला संदिग्ध तो होगा ही।

अमूमन बजट में नगर निकायों के आय,व्यय और भविष्य की योजनाओं के अनुसार बजट की व्यवस्था की जाती है और उसी के अनुरूप सड़क, नाली, गली, पानी, सौंदर्यीकरण सहित नगर निकायों के जनहित के कार्य को संपादित किया जाता है। लेकिन जब जनता और सरकारी तंत्र को बेवकूफ बनाने की ठान ली गयी हो तो मनमानी की चरम सीमा इसी को कहा जाता है।

नगर पंचायत सूत्रों के अनुसार मार्च में आचार संहिता अवधि अथवा उसके बाद के महीनों में अनिवार्य रूप से बजट को पास कराया जाना था, लेकिन अवैध कार्यो के मनमानी निकासी को लेकर उत्पन्न हुए विवादों के कारण नगर पंचायत बोर्ड की सामान्य बैठक भी छः माह पर हो रही है। हालांकि बीच में बैठक भी हुई, लेकिन सिर्फ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए।

नगर निकायों के महत्वपूर्ण बजट का इतना बूरा हश्र की कल्पना तो  शायद राज्य और केंद्र की वित्तिय एजेंसियों ने भी नही की होगी। पूर्व में भी राजगीर नगर पंचायत द्वारा बिना बजट पास कराए नगर पँचायत के आंतरिक मद से अवैध कार्यो को अंजाम दिया गया।

उसकी जांच के लिए जनप्रतिनिधियों ने विभाग का दरवाजा खटखटाया है और शायद बिल भुगतान भी अभी तक लंबित है, लेकिन इस तरह के क्रियाकलाप से नगर निकायों पर अँगुली उठाना स्वाभाविक है।

वही नगर पँचायत के जनप्रतिनिधियों ने इस मामले से विभाग के वरीय अधिकारियों को भी सूचित कर जांच की मांग की है।

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