खुली स्वच्छता अभियान की पोल, कहीं था ताला लटका तो कहीं बंधी थी बकरियां

सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के नगरनौसा प्रखंड को ओडीएफ घोषित हुए महीनों बीत गये हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार जांच टीम को हरगोपालपुर गांव जाना था। वहां प्रशासन ने काफी इंतजाम किये थे। गांव में सफाई अभियान चलाया गया था। लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम बदलने से सारा इंतजाम धरा का धरा रह गया। प्रखंड प्रशासन ने सच्चाई छुपाने की काफी कोशिश की थी…….”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। केन्द्रीय अफसरों की जांच में प्रखंड में स्वच्छता अभियान के तहत बनाये गये शौचालयों की पोल खुल गयी। दर्जनों शौचालयों में ताले लटके मिले। वहीं कई शौचालयों में बकरियां बंधी थीं।

शौचालय का वह इस्तेमाल नहीं हो रहा था, जिसके लिए बनाया गया था। गुरुवार को भारत सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के अधिकारियों की टीम ने प्रखंड की भूतहाखार पंचायत स्थित वडीहा और भूतहाखार गांव के महादलित टोलों में स्वच्छता का जायजा लिया।

कहते हैं कि अधिकारियों की टीम को कैला पंचायत के हरगोपालपुर गांव जाना था। अंतिम समय में टीम हरगोपालपुर नहीं जाकर बडीहा और भूतहाखार पहुंच गयी। टीम ने शौचालयों की हालत देखकर काफी नाराजगी जाहिर की और बैरंग वापस लौट गये।

इस दौरान ग्रामीणों ने शौचालय निर्माण की राशि नहीं मिलने की भी शिकायत की। टीम में जल एवं स्वच्छता मंत्रालय के मुख्य सचिव परमेश्वरन अय्यर, राज्य समन्वयक राजीव कुमार सिंह के अलावे उपविकास आयुक्त, जिला समन्वयक, डीपीआरओ, प्रखंड समन्वयक, बीपीएम, जेएसएस, आरओ, सीओ, बीपीआरओ आदि शामिल थे।

टीम सबसे पहले पंचायत के वार्ड नंबर एक और दो वडीहा गांव पहुंची। वहां धनपत पासवान और अनिता देवी के घर शौचालय का जायजा लिया। उसके बाद टीम भूतहाखार गांव स्थित वार्ड नंबर 8 महादलित टोला पहुंची।

वहां नंदे मांझी के शौचालय को बकरीघर बना दिया गया था। शौचालय में ही बकरीपालन हो रहा था। वहीं दर्जनों शौचालयों में ताला लटका था। अधिकारियों ने इसपर काफी नाराजगी जतायी।

तय कार्यक्रम के अनुसार टीम को हरगोपालपुर गांव जाना था। इसके लिए स्थानीय प्रशासन ने हरगोपालपुर में काफी इंतजाम किये थे। गांव में सफाई अभियान चलाया गया था।

ताकि टीम को वास्तविक सच्चाई का पता नहीं चले। लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम बदलने से सारा इंतजाम धरा का धरा रह गया। प्रखंड प्रशासन ने सच्चाई छुपाने की काफी कोशिश की थी।

ग्रामीण तो यह भी पूछ रहे थे कि बाहर से जांच में आये अधिकारियों को सिर्फ हरगोपालपुर ही क्यों दिखाया जाता है। जांच के लिए दूसरे गांवों का चयन क्यों नहीं होता है।

सरकार ने शौचालय निर्माण से लेकर जागरूकता के लिए कई कार्यक्रम चलाये। लेकिन ग्रामीणों की आदत में बदलाव नहीं आया है। अभी भी लोग खुले में शौच जाना पसंद करते हैं। ग्रामीण सड़कों का हाल जस का तस है। सड़कों के किनारे गंदगी का अंबार लगा है।   

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