‘कॉरपोरेट क्रिकेट लीग’ के नाम पर मनीषा-चिरंतन ने खेला ‘लंबा खेल’

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“..इसी क्रिकेट लीग के बहाने ही ऊपर तक अपनी पहुंच बनाने वाली मनीषा दयाल और चिरंतन ने बिना किसी टेंडर के आश्रय होम का ठेका प्राप्त कर लिया था….”

पटना (विनायक विजेता)।  राजीव नगर स्थित आसरा होम में रहने वाली दो संवासिनों की मौत के बाद चर्चा में आई इस होम की मदर संस्था ‘अनुमाया ह्यूमन रिसर्च फाउंडेशन’ के सचिव चिरंतन कुमार व कोषध्यक्ष मनीषा दयाल के कारनामें काफी लंबे हैं

फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में जेल बंद मनीषा और चिरंतन ने समाज, राजनेता और ब्यूरोक्रेट्स पर अपनी पकड़ बनाने के लिए पटना में जनवरी 2017 और 2018 में अपनी संस्था ‘अनुमाया ह्यूमन रिसर्च फाउंडेशन’ के बैनर तले दो बार ‘कॉरपोरेट क्रिकेट लीग’ के नाम से टूर्नामेंट कराया।

पहले लीग में इन लोगों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसी बीच इन दोनों का परिचय अपने को न्यूज एजेंसी यूएनआई का बड़ा अधिकारी बताने वाले ‘स्मार्ट ब्यॉय’ प्रेम कुमार से हुआ। इसके बाद से ही शुरु हो गया इस तिकड़ी का खेल।

चिरंतन और प्रेम कुमार ने मनीषा की स्मार्टनेस को राजनीतिक और ब्यूरोक्रेट्स गलियारों में भंजाया। इसके बाद ही पटकथा लिखी गई ‘कॉरपोरेट क्रिकेट लीग-2’ की।

राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स पर प्रभाव डालने के लिए ‘कॉरपोरेट क्रिकेट लीग-2’ की ब्रांड एम्बेसडर बनायीं गई ‘मिस एशिया यूनिवर्स’ की विजेता सुंदरी मनीषा रंजन, जिसका फायदा भी इस तिकड़ी ने जमकर उठाया।

इस तीकड़ी ने अपनी पहुंच का फायदा उठाते हुए जनवरी 2018 में संपन्न इस लीग के लिए लगभग 80 प्रायोजक ढूंढे, जिनसे इन्हें लगभग 90 लाख रुपये मिले।

इसके अलावा इन्हें समाजिक सारोकार रखने वाले कई वीआईपी से भी लाखों रुपये मिले जिसका कोई हिसाब-किताब ‘अनुमाया ह्यूमन रिसर्च फाउंडेशन’ के खाते या बही में नहीं है।

जबकि स्टेडियम आवंटन से लेकर अन्य खर्चों का भूगतान दिखावे के लिए डीडी या चेक से ‘अनुमाया ह्यूमन रिसर्च फाउंडेशन’ के खाते से ही किया गया।

इस ‘कॉरपोरेट क्रिकेट लीग-2’ में के आयोजन में कई मंत्री, राजनेता, ब्यरोक्रेट्स और उनकी पत्नियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। साक्ष्य के तौर पर जिनकी कई तस्वीरें मौजूद है

सबसे गौर करने वाली बात तो यह है कि इस लीग की विजेता भी चिरंतन की जेबी संस्था ‘एवीएन’ की टीम ही हुई थी। अंदरुनी सूत्र बताते है कि इस कॉरपोरेट क्रिकेट लीग के नाम पर मनीषा एंड कंपनी को लगभग डेढ़ करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। उन्हीं रुपयों में से मनीषा ने कुछ माह पूर्व गया में एक बेशकिमती जमीन खरीदी है।

‘अनुमाया ह्यूमन रिसर्च फाउंडेशन’ जैसी स्वयं सेवी संस्था को किसी खेल का आयोजन करने की अनुमति कैसे मिली यह भी जांच का विषय है।

इस संदर्भ में न तो समाज कल्याण विभाग और न ही राज्य खेल प्रधिकरण कुछ स्पष्ट जवाब दे रहा है, जबकि चिरंतन  खेल प्राधिकरण को लिखित पत्र और डिमांड ड्राफ्ट देकर मोईनुल हक स्टेडियम का आवंटन कराता रहा है।

अगर इस आवंटन की भी गहराई से जांच हो तो कई चौकाने वाले सत्य तो सामने आएंगे ही, कई राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स के भी चेहरे भी बेनकाब हो जाएंगे। 

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