कांग्रेस ने सीटों को लेकर राजद पर तरेरी आंख,15 सीटों पर उम्मीदवार तय

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“बिहार महागठगबंधन में फिलहाल सब कुछ ठीक नहीं दिख रहा है। कांग्रेस भी अब पूरी तरह से रौ में नजर आ रही है…..”

पटना (जयप्रकाश नवीन)। बिहार महागठगबंधन में फिलहाल सब कुछ ठीक नहीं दिख रहा है। पूर्व सीएम जीतनराम मांझी की पार्टी ‘हम’ ने पहले ही रालोसपा से ज्यादा सीट की मांग करते हुए 18 फरवरी तक सीट शेयरिंग का अल्टीमेटम दिया है।

वही कांग्रेस भी अब रौ में नजर आ रही है। उसने भी सम्मानजनक सीट की मांग करते हुए एनडीए की तर्ज पर फिफ्टी -फिफ्टी फार्मूले पर चुनाव लड़ने की मांग रख दी है।

लेकिन राजद को इस फॉर्मूले पर इतराज है। कांग्रेस से बराबर की हिस्सेदारी राजद को पच नही रही है। लेकिन कांग्रेस अब बिहार में अपनी कहानी खुद गढने की सोच रही है।

बिहार में तीन दशक से चला आ रहा सियासी सूखा खत्म करने की जुगाड में लगी दिख रही कांग्रेस अब समझौते के मूड में नहीं दिख रही है।

महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर संस्पेंस बरकरार है।जीतन राम मांझी के बाद अब कांग्रेस ने सम्मानजनक सीट को लेकर अपनी आवाज उठा दी है।

कांग्रेस के विधायक तथा वरीय नेताओं ने आलाकमान के सामने यह बात रखी  हैं कि आरजेडी और कांग्रेस बराबर बराबर सीटों पर चुनाव लडें।

कांग्रेस विधायक अजित शर्मा ने कहा है कि विधायक होने के नाते उनकी इच्छा है कि आरजेडी सीटों का बंटवारा कांग्रेस के साथ बराबर- बराबर करे। कांग्रेस का इधर जनाधार भी बढ़ा है।

बताते चलें कि कुछ दिन पूर्व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह ने दिल्ली में आलाकमान से मुलाकात कर बिहार में सीटें बढ़ाने को लेकर राजद पर दबाव बनाने को लेकर चर्चा भी कर चुके हैं।

सदानंद सिंह ने कहा है कि आलाकमान के सामने हमलोगों ने अपनी भावना बता दी है। कांग्रेस के पास आज की तारीख में पिछली बार की तुलना में ज्यादा सक्षम उम्मीदवार हैं।

कांग्रेस खेमे में चर्चा है कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव को लेकर कमर कस चुकी है। कांग्रेस ने 15 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन भी बना लिया है।वहाँ के लिए प्रत्याशी भी लगभग तैयार कर ली है।

पिछले लोकसभा चुनाव में सुपौल से रंजीत रंजन तथा किशनगंज से असरारूल हक ही जीत सकें थे। इस बार किशनगंज से स्थानीय विधायक डॉ जावेद की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है।

कटिहार सीट पर एनसीपी छोड़ कर आए तारिक अनवर की भी उम्मीदवारी तय है। समस्तीपुर से कांग्रेस के अशोक राम पिछले बार बहुत कम मतों से चुनाव हार गए थे। कांग्रेस इस बार फिर उनके नाम पर ही मुहर लगा सकती है।

सासाराम(सुरक्षित) पर मीरा कुमार के नाम से इंकार नहीं किया जा सकता है। दरभंगा से भाजपा के बागी सांसद कीर्ति आजाद 15 फरवरी को कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं, ऐसे में उनकी उम्मीदवारी सुरक्षित है। वही मधेपुरा से सांसद पप्पू यादव इस बार कांग्रेस से उम्मीदवार हो सकते हैं।

उधर बाहुबली मोकामा से विधायक अनंत सिंह मुंगेर से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने को लेकर एड़ी चोटी एक कर रहे हैं।

कयास लगाया जा रहा है कि औरंगाबाद से निखिल कुमार तथा अवधेश नारायण सिंह में से किसी एक को टिकट मिल सकता है। नवादा में अनिल शर्मा, श्यामसुंदर सिंह धीरज के नाम पर मुहर लग सकती है।

वहीं नालंदा से जो खबर छनकर आ रही है, उसके मुताबिक पूर्व विधायक तथा कुर्मी चेतना महारैली के नायक सतीश कुमार भी कांग्रेस के टिकट पर किस्मत आजमा सकते हैं।

वहीं कांग्रेस भाजपा के बागी सांसद सिनेस्टार शत्रुहन सिन्हा को अपने खेमे में लाने की कोशिश कर रही है। अगर ऐसा नहीं हुआ भी तो ज्यादा संभावना उनके महागठबंधन से चुनाव लड़ने की दिख रही है।

वहीं पूर्णिया से भाजपा के दिग्गज पूर्व सांसद उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह की भी उम्मीदवारी कांग्रेस से तय मानी जा रही है। लेकिन पप्पू यादव को लेकर पेंच फंसता दिख रहा है कि पप्पू यादव मधेपुरा से चुनाव लड़ेगे या फिर पूर्णिया से।

वहीं मधुबनी से कांग्रेस ने शकील अहमद को मैदान में उतारने का फैसला किया है। लोजपा से नाराज चल रहें सांसद महबूब अली कैसर भी खगडिया से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं ।

कांग्रेस के विधायक अब बराबर बराबर सीटों पर चुनाव लडने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। जीतन राम मांझी भी आरएलएसपी के साथ कुछ ऐसा ही खेल खेलना चाहते हैं।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि महागठबंधन में क्या फिफ्टी-फिफ्टी का सियासी खेल वाकई जमीन पर उतर पाएगी।

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