कतरीसराय में 22 मोबाइल और 3 लैपटॉप समेत दबोचे गये 5 ठग

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 हमेशा से सुर्खियों में रहा प्राचीन वैद्यों की नगरी कतरीसराय वर्तमान में पूरे देशों में ठगों की नगरी से प्रसिद्ध हो गया उक्त स्थान ठगी को लेकर हमेशा से चर्चा में रहा है। जहां बिहार राज्य के अलावा दूसरे राज्यों की भी पुलिस ठगों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की।

बिहारशरीफ (राजीव रंजन)।  नालंदा पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार पोरिका को गुप्त सूचना मिली कि कतरीसराय थाना अंतर्गत मायापुर गांव में साइबर अपराधी एवं ठग गिरोह की संख्या बढ़ गई है और यह भोले भाले लोगों को अपने ठगी के जाल में फंसाकर रुपया खींचता है।

सूचना के सत्यापन एवं कार्रवाई हेतु अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राजगीर संजय कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया गया। इस टीम में गिरियक अंचल के पुलिस निरीक्षक सुनील कुमार सिंह, गिरियक थाना अध्यक्ष नंदकिशोर प्रसाद, कतरीसराय थाना अध्यक्ष आलोक कुमार एवं नालंदा थाना अध्यक्ष बिगाऊ राम शामिल थे।

गठित टीम के द्वारा कतरीसराय थाना क्षेत्र के मायापुर गांव में छापेमारी किया गया, जिसमें 5 साइबर अपराधी को 3 लैपटॉप, 3 प्रिंटर, 5 ATM, 17000 रुपए  नगद, नापतोल के ग्राहकों का 20 पेपर लिस्ट, डाकघर में नौकरी हेतु 420 फार्म तथा 3 मोटरसाइकिल के साथ दबोचा गया।

पकड़े गये ठगों की पहचान कतरीसराय थाना क्षेत्र के मायापुर गांव निवासी दानी प्रसाद का पुत्र राजीव रंजन, राज कुमार प्रसाद का पुत्र अमर कुमार, भीखारी मिस्त्री का पुत्र सोनू मिस्त्री ,विजय प्रसाद का पुत्र विकास कुमार, शेखपुरा जिले के शेखोपुर सराय थाना क्षेत्र के पांची गांव निवासी सरयुग प्रसाद प्रसाद का पुत्र आलोक कुमार उर्फ पप्पू के रूप में किया गया।

गिरफ्तार ठगों ने बताया कि मायापुर गांव में ही 9:00 से 10:00 गिरोह इस तरह के कार्य में सक्रिय हैं तथा हर एक गिरोह के 4 से 5 सदस्य होते हैं और इन सबों के द्वारा नापतोल के ग्राहकों की सूची एवं अन्य मार्केटिंग कंपनियों की सूची प्राप्त कर ग्राहकों को लकी ड्रा में महंगी गाड़ियों का प्रलोभन देकर क्या ग्राहकों को अपना खाता नंबर देकर भोले भाले लोगों से गाड़ी के टैक्स और कागजों के नाम पर ठगी कर पैसे  मंगवाने का कार्य  किया जाता है।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मायापुर गांव में वर्तमान में 9 गिरोह को चिन्हित किया गया है, जो देश के अन्य राज्यों से भी ठगी का काम करते हैं। चिन्हित गिरोह में से एक सरपंच का गिरोह भी शामिल है।  

डाकघर में नौकरी के नाम पर भी करते थे ठगी 

 उक्त ठगों के पास से डाकघर में नौकरी कराने हेतु 400 फॉर्म  बरामद किया गया जिसमें अभ्यार्थियों का नाम पता और मोबाइल नंबर अंकित था।

इनके द्वारा उनके मोबाइल पर फोन कर डाकघर में नौकरी के नाम पर पैसे ठगी करने का जाल रचा जाता था।

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