उज्वला योजनाः कितना हकीकत, कितना फसाना

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“पहली बार जब लोगों को चूल्हा मिला लकड़ी से खाना पकाने वाले महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान आई, लेकिन यह मुस्कान ज्यादा दिन तक नहीं रह पाई । 1 माह बाद जब गैस खत्म हुआ तो यह महिलाएं लकड़ी पर खाना पकाना शुरू कर दी…..”

सऱायकेला (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज/ संतोष कुमार)। केंद्र सरकार और राज्य सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना सऱायकेला जिला में में दम तोड़ता जा रहा है।

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के पड़ोसी जिला का यह हाल है कि 70% महिलाएं लकड़ी और उपलों से खाना पका रही है और इसका मुख्य कारण है 750 रूपए  में गैस सिलेंडर खरीदना।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत निःशुल्क गैस सिलेंडर और चूल्हा देने का ऐलान किया। हालांकि चूल्हा और रेगुलेटर झारखंड सरकार ने देना शुरू कर दिया।

पहली बार जब लोगों को चूल्हा मिला लकड़ी से खाना पकाने वाले महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान आई, लेकिन यह मुस्कान ज्यादा दिन तक नहीं रह पाई । 1 माह बाद जब गैस खत्म हुआ तो यह महिलाएं लकड़ी पर खाना पकाना शुरू कर दी।

जिले में ज्यादातर आबादी गरीबी रेखा से नीचे की है। जहां आदित्यपुर, सालडीह बस्ती, कुलुपटांगा बस्ती, मांझी टोला, आसंगी, बर्गीडीह, बंतानगर आदि ईलाकों की  महिलाएं कोयला और लकड़ी से खाना पकाना शुरू कर दी है।

बता दें कि जिस गरीब के पास 750 रूपए होगा वही गैस सिलेंडर खरीद पाएगा। अगर 750 रूपए नहीं है तो सरकार आपको गैस सिलेंडर नहीं देगी। इतना ही नहीं सब्सिडी का पैसा तब आपको मिलेगा जब आपके खाते में 2000 से लेकर 3000 होगा।

अगर खाता में पैसा कम है, तो सब्सिडी का पैसा खाता के मेंटेनेंस में काट लिया जाएगा। यानी गरीबों को मिलने वाली सुविधा महज दिखावा है।

कुछ महिलाओं का यह भी कहना है कि 1000 रूपए मेरे पास होंगे तो हम सबसे पहले अपने बच्चों के लालन-पालन में लगाएंगे। वही दिहाड़ी काम करने वाले लोग बैंक में कहां से पैसा जमा करेंगे। ये वैसे लोग हैं, जो रोज कमाते हैं और रोज खाते हैं।

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