इस टेंडर से खुली भ्रष्टाचार की पोल, जांच-कार्रवाई करे प्रशासन-सरकार

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“राजगीर नगर परिषद के रहनुमा नित्य नए कारनामें कर रहे हैं। इस बार वे गर्मी में ठंढ से बचने की तैयारी में जुट गए हैं। हो सकता है कि यह ‘मार्च लूट’ की तैयारी हो…”

राजगीर (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज/नीरज)। एक प्रतिष्ठित दैनिक अखबार हिन्दुस्तान के 20 फरवरी,2019 के अंक के पेज-15 पर कार्यालय नगर पंचायत,राजगीर, नालंदा (बिहार सरकार) द्वारा एक अल्पकालीन कोटेशन आमंत्रण सूचना संख्या-…./2018-19  विज्ञापन प्रकाशित की गई है।

यह हैरतअंगेज विज्ञापन नगर पंचायत कार्यालय के मुख्य पार्षद उर्मिला देवी, उप मुख्य पार्षद पिंकी देवी एवं कार्यपालक पदाधिकारी के हवाले से प्रकाशित हुई है।  

विज्ञापन में उल्लेख है कि दिनांक- 10.11.2018 को सम्पन्न हुई स्थाई समिति/बोर्ड बैठक में सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय प्रस्ताव के आलोक में आगामी शीत ऋतु के मद्देनजर नगर पंचायत राजगीर के क्षेत्रान्तर्गत कुल 19 वार्डों के लिए 3000 (तीन हजार) अदद कबंल क्रय किया जाना है।

अतएव कंबल की आपूर्ति हेतु इच्छुक आपूर्तिकर्ता / फर्म / एजेंसी से दिनांक- 25.02.2019 के अराह्न 3.00 बजे तक अधोहस्ताक्षरी के कार्यालय कक्ष में मुहरबंद कोटेशन आमंत्रित की जाती है। निराधारित समय एवं तिथि के बाद कोटेशन को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

विज्ञापन में आगे लिखा है कि प्राप्त कोटेशन की उसी दिन अपराह्न 4.00 बजे नगर पंचायत के क्रय समिति / सशक्त स्थाई समित के सदस्यों के बीच खोली जाएगी।

इस बाबत नगर पंयात के मुख्य पार्षद उर्मिला देवी ने एक्सपर्ट मीडिया न्यूज को साफ शब्दों में कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। उनकी जानकारी में जो भी कंबल तात्कालीन तौर कार्यालय द्वारा मिला था, वे ठंढ के दौरान बांटे जा चुके हैं। ऐसे में अब किसने किस मंशा से उनके भी नाम का उल्लेख करते हुए ऐसा विज्ञापन निकाला है, वे कुछ नहीं जानते।

इस बाबत नगर पंचायत पार्षद सह जदयू अध्यक्ष मीरा कुमारी ने निकाले गए टेंडर के प्रति अनभिज्ञता प्रकट करते हुए बताया कि बोर्ड की बैठक नवंबर, 2018 माह में भीषण ठंढ के दौरान हुई थी और अब टेंडर निकाला जा रहा है तो पुछिए न कार्यपालक पदाधिकारी से।

जब उनसे पूछा गया कि आप एक पार्षद हैं और आपकी भी जबाबदेही बनती है? इस पर उनका कहना था कि दरअसल मिस्टेक हुआ है। नवंबर में लिया गया प्रस्ताव। कबंल आ गई। कंबल हमलोग बांट दिए। 119 कंबल उन्होंने खुद अपने वार्ड में बांटी हैं। लेकिन ये कंबर टेंडर से ही खरीदाता। लोग नियवली देख नहीं पाए। अब जो टेंडर लेगा, उसी के जरिए भुगतान होगा।

यह तो ऐसा ही न हुआ कि सरकार मैट्रिक का सर्टिफिकेट बच्चों को पहले दे दे और फिर उसके बाद उसकी पढ़ाई पहली क्लास से शुरु करवाए?

इस पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि सबाल तो सही बोल रहे हैं. लेकिन उस समय जो परिस्थितियां बनी थी, सारा कुछ किया गया।

इधर नगर पंचायत के पूर्व पार्षद सह भाजपा जिला उपाध्यक्ष श्याम किशोर भारती का दो टूक कहना है कि इस तरह से नगर पंचायत के द्वारा जो भी कार्य किए जा रहे हैं, इससे सरकार की छवि और प्रशासन की कार्यशैली धूमिल होती है। इस पर कड़ाई से संज्ञान लेने की जरुरत है।

उन्होंने कहा कि इसमें लूट-खसोट की बू आ रही है। ठंढ के दौरान बामुश्किल कहीं 80 कबंल तो कहीं 10 कबंल बांटे गए। अब 3000 कंबल का टेंडर निकाल कर क्रय क्यों किया जा रहा है। यह सब बंदरबांट की स्थिति स्पष्ट करती है। कबंल घोटाला भी इसे कह सकते हैं।

उधर श्री भारती ने अपने फेसबुक वाल पर भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। जिसपर बड़े गंभीर प्रतिक्रिया देखने को मिल रहे हैं।

श्री भारती ने लिखा है कि 3 हज़ार कम्बल खरीदने की निविदा निकाल दी गयी है। 25 फरवरी को इच्छुक लोग निविदा में भाग लेकर कम्बल जल्द से जल्द नगर पंचायत को उपलब्ध करा दें, ताकि सभी वार्डो में 157 कम्बल बंट जाए। गर्मी शुरू होने से पहले इसे बांटना भी है। ताकि गर्मी में ठंढी का एहसास हो।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरीय पत्रकार राम विलास लिखते हैं कि  जाड़ा बाद मार्च में कम्बल क्रय करने और वितरण करने का कोई औचित्य नहीं है। डीएम नालंदा सहित अपर मुख्य सचिव नगर विकास एवं आवास विभाग को संज्ञान लेना चाहिए और नगर कार्यपालक पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

संजय लिखते हैं, ” हो सकता है श्याम भाई, बैठक में कोई मौसम की जानकारी रखने वाले साहब भी उपस्थित रहे हों”

कुमार प्रशांत की प्रतिक्रया है, “आप लोग इतना परेशान क्यों हैं आपको एक पुरानी कहावत नहीं याद है इस चैत माह में पंडित जी गाय बेचकर कंबल खरीदे थे। अभी-अभी बिहार के मौसम वैज्ञानिक ने कहा है कि 25 26 और 27 तारीख को बिहार में बरसात होगी और ओले भी पड़ेंगे इसीलिए राजगीर नगर पंचायत के द्वारा तत्काल कंबल का प्रबंध कराया जा रहा है”।

वरीष्ठ अधिवक्ता विश्वनाथ प्रसाद सीधी व्यंग्य करते हैं कि अभी भी धथुरा राजगीर में मिलता है क्या?

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