इस अस्पताल में एक बार फिर यूं शर्मशार हुई मानवता

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“उधर मृतका का पति पैसों के अभाव में अस्पताल के बाहर बैठ कर रोने लगा। इसके बावजूद भी किसी का दिल नहीं पसीजा। वहीं करीब 1 घंटे तक  शव लेकर परिजन  कभी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड तो कभी वार्ड में घूमते रहे। फिर थक हारकर एक ऑटो को हायर किया और उसके बाद  देर रात शव लेकर घर पहुंचा….”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क (संतोष कुमार)। कोल्हान का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एमजीएम अस्पताल है, जो हर दिन किसी न किसी कारगुजारियों के कारण चर्चा में बना रहता है।  इस अस्पताल ने एक बार फिर से मानवता को शर्मसार किया है।

बता दें कि इस अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो गई और मौत के बाद  शव को घर ले जाने के लिए अस्पताल ने न स्ट्रेचर दिया और ना ही एंबुलेंस। 

वहीं महिला का पति, बच्चा और देवर शव को अपने कंधों पर लेकर अस्पताल में घूमते रहे। कर्मचारियों के सामने गिड़गिड़ाते रहे। शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था कराने के लिए फरियाद लगाते रहे। लेकिन किसी ने एक ना सुनी और मूक दर्शक बनकर सभी देखते रहे।

उधर मृतका का पति पैसों के अभाव में अस्पताल के बाहर बैठ कर रोने लगा। इसके बावजूद भी किसी का दिल नहीं पसीजा। वहीं करीब 1 घंटे तक  शव लेकर परिजन  कभी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड तो कभी वार्ड में घूमते रहे।

फिर थक हारकर एक ऑटो को हायर किया और उसके बाद  देर रात शव लेकर घर पहुंचा। वैसे इस अस्पताल ने एक बार फिर नियम कानून को ताक पर रखते हुए सरकार के  कारनामे का पोल खोल दिया है। 

वैसे महिला उलीडीह  थाना अंतर्गत संकोसाई की रहने वाली  शांति सुंडी थी, जिसका अचानक तबीयत खराब हो गया था और इलाज के लिए  अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां इलाज के दौरान मौत हो गई। वैसे आईसीयू वार्ड में महिला का इलाज चल रहा था।

मंत्री सरयू राय भी उठा चुके हैं सवालः इस लापरवाह अस्पताल की बदइंतजामी पर मंत्री सरयू राय अपने ही सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाते रहे हैं। पूर्व स्वास्थ्य सचिव निधि खरे भी इस अस्पताल के कुव्यवस्था पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने इस अस्पताल को लेकर आज तक कोई रुचि नहीं दिखाई। वैसे झारखंड के मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र के अस्पताल का ये दुर्दशा है तो झारखंड के अन्य जिलों के सरकारी अस्पताल की स्थिति क्या होगी इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है।

सीएम ने दुबारा कभी इस अस्पताल की नहीं ली सुधः मुख्यमंत्री बनने के बाद चार साल पहले बड़े तामझाम के साथ मुख्यमंत्री रघुवर दास एमजीएम अस्पताल पहुंचे थे, जहां अपने चीर-परिचित शैली में अस्पताल के अधिकारियों और चिकित्सकों को सुधरने और सुधारने का फरमान सुनाया था।

लेकिन अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों ने सीएम के नसीहतों को जुमला समझ नकार दिया और अपने ही ढर्रे पर आज भी चल रहे हैं।

इधर चार वर्षों में मुख्यमंत्री सैकड़ों बार जमशेदपुर और आसपास सरकारी, पारिवारिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने जमशेदपुर आए जरूर, लेकिन सीएम आवास से दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस अस्पताल में दुबारा आज तक मुख्यमंत्री नहीं पहुंचे।

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