आपूर्ति विभाग-डीलरों की साठगांठ से यूं लुट रही है गरीबों का निवाला!

गरीबों को मिलने वाला अनाज यदि भ्रष्ट सिस्टम की भेंट चढ़ जाए तो यक़ीनन इसे सुशासन नहीं कह सकते…………….”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। मामला नालंदा जिले के राजगीर नगर पंचायत के वार्ड 11 की है, जहाँ गरीबो को सरकार द्वारा दो साल से दिया जा रहा गेहूँ, चावल का एक दाना भी इनलोगो को नसीब नही हुआ।

राजगीर बस स्टैंड चौराहे पर फल बेचने वाली मीना देवी, गाड़ी ड्राइवर विनोद राय की पत्नी कौशिल्या देवी, गाड़ी ड्राइवर राजकुमार दास की पत्नी लीला देवी, रेखा देवी जैसी कई गरीब महिलाएं है और होंगी जिनका नाम तो राशन कार्ड की सूची में है और डीलर द्वारा कागज़ पर इन्हें अनाज भी दिया जा रहा है, लेकिन 2 वर्षों से न इन्हें उजला राशन कार्ड मिला है और ना ही इन्हें अनाज का एक दाना।

केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना के तहत सरकार को अब लगता है कि हर गरीब के घर मे हमने अनाज पहुंचा दी लेकिन वास्तविकता यह है कि सरकारी तंत्र ने सारी व्यवस्था में लूट-खसोंट के लिए जगह बना रखी है।

सभी गरीबो को सरकारी अनाज मुहैया करा दिए जाने वाली बिहार सरकार के दावे पर पोल खोलती यह खबर राजगीर अनुमंडल प्रशासन के लिए एक चुनौती है, क्योंकि जब सरकारी स्तर पर जब सभी राशनकार्ड धारियों का आधार लिंक्ड दो साल से हो रहा है तो फिर किस मेलजोल से इन गरीबो का अनाज कौन हज़म कर रहा है ।

एसईसीसी 2011 के आधार पर उजला राशन कार्ड बांटे गए, लेकिन जब बहुत सारे लोगो का नाम छूट गया। तब जिला प्रशासन के निर्देश पर प्रखण्ड कार्यालय में राशन के लिए आवेदन जमा हुए। उन्ही आवेदनों के बाद नए लोगों का नाम राशन कार्ड में जोड़ा गया।

नाम तो जुड़ा लेकिन राशन कार्ड आम जनता को उपलब्ध नहीं कराने से साफ स्पष्ट है कि आपूर्ति विभाग के सांठ गाँठ से यह कुकृत्य किया जा रहा है। जिसके लिए प्रखण्ड आपूर्ति कार्यालय से लेकर जनवितरण डीलर जवाबदेह है, क्योंकि आधार लिंक्ड कराने की जिम्मेवारी भी इन्ही सबों की थी।

जाहिर है कि गरीबों के निवाले हड़पने से ऐसे सैकड़ों-हज़ारों राशन कार्ड होंगे, जिसका अनाज का अनुचित उठाव हो रहा है। वैसे कार्ड को चिन्हित कर इसे योग्य लाभुकों को पहुँचा कर भी सुशासन की स्थापना हो सकती है।

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