आचमन तो छोड़िये, नहाने लायक भी नहीं रह गया बड़गांव सूर्य तालाब

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“पौराणिक सूर्यपीठों में शुमार बड़गांव सूर्य तालाब में व्याप्त गंदगी के कारण केवल प्रदूषण ही नहीं बढ़ा है बल्कि प्रदूषण का अधिक खतरा बैक्टिरीया की बढ़ती संख्या से है।”

नालंदा (राम विलास)। देश और प्रदेश के पौराणिक सूर्यपीठों में बड़गांव का नाम भी शुमार है। यहां एक द्वापर कालीन सूर्य तालाब है। इस तालाब में हर दिन प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। बढ़ते प्रदूषण से इसके जल गंदे व हरे हो गये हैं। ऐसा प्रदूषित पदार्थ गिरने और देवी देवताओं की प्रतिमा विर्सजन से होता है।

हालांकि दुर्गापूजा में इस पर जिला प्रशासन ने इस तालाब में प्रतिमा विर्सजन पर रोक लगाया है। पवित्र माना जाने वाला यह सूर्य तालाब का जल इतना गंदा हो गया है कि अब इस्तेमाल के लायक नहीं रह गया है।

इस तालाब का पानी बाहर नहीं निकलता है, जबकि पहले उतर पश्चिम कोने के पुल से इसके पानी निकलते थे। तालाब के पानी बाहर नहीं होने के कारण ही शायद इतनी गंदगी हो गई है।

स्थानीय कपिल पण्डेय, अरूण कुमार, राजेन्द्र प्रसाद सिंह, नरेश कुमार सिन्हा, अशोक कुमार एवं अन्य बताते हैं कि छठव्रती पहले इसी तालाब के पानी से छठपूजा के प्रसाद बनाती थीं। लेकिन तालाब का पानी प्रदूषित होने के बाद से तालाब के पानी से छठ का प्रसाद नहीं बनाया जाता है।

इस बाबत सिलाव के सीओ शैलेश कुमार सिंह कहते हैं कि जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में बड़गांव छठ मेला की तैयारी को लेकर आज ही बैठक हुई है। बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। शीघ्र ही सूर्य तालाब, उसके घाट, नाली आदि की सफाई करायी जायेगी।

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